लद्दाख में शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 30 स्मार्ट बस शेल्टरों के निर्माण को मंजूरी दी है। इन शेल्टरों में आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक लद्दाखी वास्तुकला की झलक देखने को मिलेगी।
स्मार्ट बस स्टाप बनने से लद्दाख के लोगों के साथ क्षेत्र में घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों को भी लाभ होगा। इसमें बस की जानकारी के साथ स्मार्ट बस स्टाप में लोगों के लिए प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। यात्रियों के आराम के साथ सुरक्षा के प्रबंध होंगे।
उपराज्यपाल ने वीरवार को स्मार्ट बस स्टाप के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि स्मार्ट बस शेल्टरों का निर्माण लद्दाख में स्मार्ट मोबिलिटी बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में अहम कदम होगा। पारंपरिक गोंपाओं (मठों) से प्रेरित ये बस शेल्टर लद्दाख की स्मृद्ध संस्कृति के प्रतीक होंगे। इन शेल्टरों में यात्रियों के लिए जीपीएस आधारित रियल-टाइम बस सूचना प्रणाली, हीटेड सीटें, वाई-फाई, सीसीटीवी निगरानी, सोलर पावर सिस्टम व एसओएस इमरजेंसी बटन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
यह परियोजना सिंधु इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा प्रभावी बनाई जाएगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार लेह के मौजूदा बस स्टाप में पर्याप्त शेड, आरामदायक बैठने की व्यवस्था व खराब मौसम में लोगों की सुरक्षा जैसी सुविधाओं की कमी है। ऐसे में नए स्मार्ट बस शेल्टर बनने से ये समस्याएं दूर हो जाएंगी। इन स्मार्ट बस शेल्टरों में पारंपरिक लद्दाखी वास्तुकला, शिंगत्साक लकड़ी का काम, पेंटसाक पेंटिंग, मिट्टी की प्लास्टरिंग, चूने की सफेदी, प्रार्थना चक्र के साथ भित्ति चित्र भी लगाए जाएंगे।
इनमें 55-इंच यात्री सूचना डिस्प्ले सिस्टम, एलइडी डिस्प्ले बोर्ड, जीपीएस आधारित बस ट्रैकिंग, क्लाउड आधारित इटीए साफ्टवेयर, मोबाइल व लैपटाप चार्जिंग स्टेशन, आक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट एड किट व दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए टैक्टाइल टाइल्स जैसी सुविधाएं भी होंगी।
हर बस शेल्टर में दो केडल्ब्यूपी क्षमता का सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम, बैटरी स्टोरेज व हाइब्रिड इंवर्टर लगाए जाएंगे। ऐसा करने से कार्बन उत्सर्जन के स्तर को कम करने में मदद मिलेगी। उपराज्यपाल ने कहा है कि इस पहल का उद्देश्य लेह में आधुनिक, टिकाऊ व लोगों के लिए अनुकूल सार्वजनिक परिवहन ढांचा तैयार करना है। ऐसा करते समय लद्दाख की सांस्कृतिक व वास्तुकला पहचान को भी सुरक्षित रखा जाएगा।


