देश के पहले केंद्र-वित्त पोषित गाय अभयारण्य में पशुधन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। आइवीएफ तकनीक से देश में पहली बार किसी गोशाला में बछड़े और बछिया का जन्म हुआ है। इनको हीरा, मोती और पद्मिनी व नंदिनी नाम दिया गया है।
ये देश के सबसे अच्छी नस्ल के बछड़े-बछिया हैं। बड़े होने पर ये बछिया 20 से 21 लीटर प्रतिदिन दूध देंगी। बड़े होने पर बछड़े सबसे अच्छी नस्ल के बुल यानी सांड़ बनेंगे। यह अभयारण्य पुरकाजी के तुगलकपुर कम्हेड़ा गांव में स्थित है।
पहली बार अभयारण्य में किया गया प्रयोग
गुरुवार को अभयारण्य का संचालन कर रही श्री गोवर्धन गोसेवा समिति के संरक्षक एवं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान ने प्रेस वार्ता में बताया कि एंब्रोय ट्रांसफर तकनीक केवल शोध संस्थानाें तक सीमित थी। इसे पहली बार गाय अभयारण्य में प्रयोग किया गया।
देश की सबसे अच्छी नस्ल की गाय का अंडा और सांड़ के शुक्राणु को अभयारण्य में लाई गई बेसहारा गायों में ट्रांसफर किया गया। इस तकनीक से तीन माह पूर्व चार बछड़े और दो दिन पूर्व दो बछिया ने जन्म लिया। बछिया नंदिनी और पद्मिनी गिर नस्ल की और बछड़े हीरा व मोती साहिवाल नस्ल के हैं।
पद्मिनी के पिता यानी सांड़ की क्षमता प्रति वर्ष 4474 लीटर दूध उत्पादन की है, वहीं इसकी मां यानी गाय की क्षमता प्रति वर्ष 3932 लीटर दूध उत्पादन की है। इस तरह इसके जन्म के समय ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये बड़ी होकर लगभग 20-21 लीटर दूध प्रतिदिन देगी।
अब तक हो चुके 161 प्रत्यारोपण
हीरा और मोती भी देश की सर्वोच्च नस्ल वाले हैं। उन्होंने बताया कि अभयारण्य में राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के निर्देशन में यह अभियान चल रहा है। प्रत्येक प्रत्यारोपण पर 25 हजार रुपये का खर्च आता है। एनडीडीबी द्वारा लैब में एंब्रोय बनाया गया।
इसके बाद यहां बेसहारा गाय यानी एक तरह की सरोगेट मदर में प्रत्यारोपित किया गया। इस तरह एनडीडीबी 500 भ्रूण प्रत्यारोपण करेगा।
अब तक 161 प्रत्यारोपण हो चुके हैं। इसके जरिए चार बछड़े और दो बछिया ने जन्म लिया। ब्रीडिंग में भारतीय नस्ल को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
खेतों या जंगलों व नगरों में विचरण करने वाली गायों को अभयारण्य में रखा गया है। ये गायें अन्य किसी काम की नहीं होतीं। इनका उपयोग सरोगेट मदर के रूप में करके देश के डेरी उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया जा रहा है।
डॉ. बालियान ने बताया कि भविष्य में सबसे छोटे कद वाली गाय पुंगनूर भी यहां तैयार की जाएंगी। इस अवसर पर श्री गोवर्धन गोसेवा समिति के अध्यक्ष विपुल भटनागर, समाजसेवी भीमसेन कंसल, गन्ना सहकारी समिति तितावी के चेयरमैन शंकर सिंह भोला, डॉ. राजन, मोंटी सैनी, बलविंदर आदि उपस्थित रहे।


