गंगासागर से गंगोत्री तक भगवा लहराया, अब हिमालय के सीमांत क्षेत्रों में राष्ट्रवाद का नया प्रयोग

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 राजनीति में जब भी बड़े प्रतीकों के जरिये संदेश देने की कोशिश होती है, तो नजर हिमालय की ओर उठती है। आदि कैलास के पास गुंजी में कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर लगाकर भाजपा आस्था, संस्कृति और राष्ट्रवाद का कुछ ऐसा ही उद्घोष करना चाहती है।

गंगासागर से गंगोत्री तक भगवा लहराने के बाद पार्टी शिविर के जरिये अपनी वैचारिक व राजनीतिक जड़ों को हिमालय के सीमांत क्षेत्रों में और गहरा करने की कोशिश में है।

13 मई से आयोजित होगा प्रशिक्षण शिविर

आदि कैलास के नजदीक 13 मई से आयोजित होने जा रहा यह प्रशिक्षण शिविर पहली नजर में सामान्य संगठनात्मक गतिविधि लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की राजनीतिक पटकथा बड़ी गहरी है। दरअसल भाजपा राजनीति में स्थानों का महत्व बखूबी समझती है।

अयोध्या, काशी, केदारनाथ और अब आदि कैलास। विगत कुछ वर्षों में पार्टी ने धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को केवल आस्था के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी प्रतीकों के रूप में भी स्थापित किया है। इसी रणनीति के तहत अब सीमांत हिमालय को भाजपा नई राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने जा रहा है।

धामी ने तैयार की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जमीन

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले पांच सालों में उत्तराखंड में हिंदुत्व का रंग काफी चटख कर दिया है। यूसीसी से लेकर मदरसा बोर्ड की समाप्ति व अवैध मजारों पर बुलडोजर चलाकर सीएम धामी ने उत्तराखंड को हिंदुत्व की राजनीति का नया केंद्र बना दिया है।

अब भाजपा संगठन भी आगामी चुनाव के लिए उत्तराखंड को राष्ट्रवाद की प्रयाेगशाला बनाना चाहता है। आदि कैलास में शिविर का आयोजन इसी रणनीति का हिस्सा है।

सीमांत हिमालय तक पहुंची राजनीति

गुंजी में प्रशिक्षण शिविर लगाकर भाजपा संदेश देना चाहती है कि उसकी राजनीति मैदानों से निकलकर सीमांत हिमालय तक पहुंच चुकी है, जिस तरह बंगाल में गंगासागर को सांस्कृतिक आस्था के प्रतीक के रूप में उभारा गया, उसी तरह उत्तराखंड में आदि कैलास, सीमांत गांव व चीन सीमा को राष्ट्रवाद की राजनीति से जोड़ते हुए पार्टी धार्मिक आस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और पहाड़ की अस्मिता को साधने की कोशिश कर रही है।

ताकि मजबूत हो सैन्य वर्ग से रिश्तों की डोर

उत्तराखंड में भाजपा का सबसे बड़ा आधार सैन्य परंपरा से जुड़ा राष्ट्रवादी मतदाता है। ऐसे में चीन सीमा के पास कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर पार्टी सीधे सैन्य वर्ग से भावनात्मक संबंध जोड़ने का प्रयास कर रही है।

इस शिविर के बहाने पर भाजपा सीमांत हिमालय को राष्ट्रवाद की अग्रिम चौकी के रूप में स्थापित करने का संदेश देना चाहती है। सीमा के निकट भगवा उपस्थिति दर्शाकर पार्टी यह संकेत देने का प्रयास कर रही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और सीमांत विकास उसकी राजनीति के केंद्र में हैं।

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