पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने गुरुवार को प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक इंदू रानी दुबे के साथ गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में बीओबीआर रेक का फुटप्लेट निरीक्षण किया।
यह निरीक्षण ग्रैंड काॅर्ड (जीसी) लाइन के चुनौतीपूर्ण रेलखंड पर किया गया, जिसकी शुरुआत वर्ष 1906-07 में लार्ड मिंटो के समय हुई थी।
धनबाद मंडल के गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में 1:80 का रूलिंग ग्रेडिएंट, तीन सुरंगें, छोटी पहाड़ियां एवं ऊंचे टीले होने के कारण इसे अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
सुरंगों की ऊंचाई कम होने से थी समस्या
आजादी से पूर्व निर्मित इस रेलखंड में सुरंगों की ऊंचाई सीमित होने एवं अन्य अवरोधों के कारण अब तक बीओबीआर वैगनों का परिचालन नहीं हो पाता था।
पूर्व मध्य रेलवे ने आइआइटी-आइएसएम धनबाद के सहयोग से टनलों के रीडिजाइन एवं डाइमेंशन बढ़ाने का कार्य पूरा किया। इसके बाद डाउन लाइन में खाली बीओबीआर रेक का सफल ट्रायल संभव हो सका है।
कोयला परिवहन में समय की हाेगी बचत
रेल अधिकारियों के अनुसार इस पहल से गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में बीओबीआर रेक परिचालन का रास्ता साफ होगा। इससे बाढ़, बरौनी एवं सलाकाटी स्थित एनटीपीसी प्लांटों के लिए कोयला परिवहन में समय की बचत होगी तथा वैगन टर्नअराउंड में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
अभी तक इन संयंत्रों के लिए कोयले का परिवहन बाक्स-एन रेक अथवा बीओबीआर रेक को प्रधानखांटा-आसनसोल-झाझा मार्ग से किया जाता था, जिसमें अधिक समय लगता था।
अब जीसी लाइन के जरिए खाली बीओबीआर रेक की शीघ्र वापसी धनबाद मंडल को हो सकेगी। इससे रेक की उपलब्धता बढ़ेगी और कोयला लोडिंग क्षमता में भी इजाफा होगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

