शहर से लेकर जीरो माइल तक चल रही कई सड़क निर्माण परियोजनाएं अब राशि संकट की वजह से प्रभावित होने लगी हैं।
पथ निर्माण विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं में मार्च माह से संवेदकों को 30 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान नहीं हो सका है।
30 करोड़ से अधिक का भुगतान अटका, कई परियोजनाओं पर काम बंद
इसका असर यह हुआ है कि अधिकांश परियोजनाओं का काम लगभग ठप पड़ गया है। कई जगहों पर निर्माण पूरी तरह बंद है, जबकि कुछ स्थानों पर केवल औपचारिक रूप से काम जारी है।
इसका खामियाजा आम लोगों को धूल, जाम और बदहाल यातायात व्यवस्था के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
निर्माण कार्य से प्रभावित प्रमुख मार्गों में जीरो माइल-पातर सड़क, पूर्वी आरओबी से पश्चिमी आरओबी मार्ग, रेलवे स्टेशन से जज कोठी मोड़, कृषि भवन से बीडीओ ब्लॉक रोड तथा आरण्य देवी से बक्सर-पटना बाईपास सड़क शामिल हैं।
इन मार्गों पर सड़क चौड़ीकरण, नाला निर्माण, पीसीसी और ड्रेनेज का कार्य कराया जा रहा था, लेकिन राशि के अभाव में अधिकांश परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं।
अधूरी खुदाई और उड़ती धूल से शहर के लोग बेहाल, बढ़ रहा आक्रोश
सबसे अधिक परेशानी जीरो माइल और शहर के व्यस्त मार्गों पर देखी जा रही है। कई स्थानों पर सड़क खोदकर छोड़ दी गई है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
दिनभर उड़ रही धूल से राहगीरों और आसपास के दुकानदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों की परेशानी और बढ़ गई है। शाम होते ही अधूरी सड़कों पर लंबा जाम लगने लगता है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़क निर्माण की धीमी रफ्तार का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है। खराब सड़क और धूल की वजह से लोग बाजार आने से बच रहे हैं या वैकल्पिक रास्तों का उपयोग कर रहे हैं।
रेलवे स्टेशन रोड और जज कोठी मोड़ जैसे व्यस्त इलाकों में प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन महीनों से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
इधर, पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सिकंदर पासवान ने बताया कि राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है। भुगतान होते ही निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ परियोजनाओं पर कार्य जारी भी है।
चार-पांच माह से लंबित है भुगतान
सूत्रों के अनुसार पथ निर्माण विभाग द्वारा संवेदकों को जनवरी-फरवरी से ही नियमित भुगतान नहीं किया गया है। मार्च के बाद से बड़ी राशि लंबित है।
विभागीय स्तर पर बिल अटकने के कारण कई एजेंसियों ने मजदूरों और मशीनों की संख्या घटा दी है, जबकि कुछ ने काम पूरी तरह बंद कर दिया है।
संवेदकों का कहना है कि भुगतान नहीं होने से डीजल, गिट्टी, सीमेंट और मजदूरी का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।
बरसात में और बिगड़ सकती है स्थिति
शहरवासियों के बीच यह चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा के दौरान जिन सड़कों को प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में शामिल किया गया था, उन्हीं योजनाओं की रफ्तार अब थम गई है।
लोगों का कहना है कि यदि जल्द राशि जारी नहीं की गई तो बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाएगी। अधूरी सड़कें कीचड़ और जलजमाव का कारण बनेंगी, जिससे लोगों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।


