सैदपुर से पहाड़ी तक प्रस्तावित करीब 5.73 किलोमीटर लंबे नाला और फोरलेन सड़क निर्माण परियोजना पर काम अब तेजी पकड़ चुका है।
लगभग 331.36 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का बड़ा हिस्सा मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बुडको के परियोजना निदेशक ने कार्यस्थल पर बताया कि पहाड़ी की ओर से करीब 1.2 किलोमीटर नाला निर्माण पूरा हो चुका है।
आरएमआरआई व एनएमसीएच के पीछे नाला निर्माण शुरू
वहीं, सैदपुर की ओर एपीजे कलाम साइंस सिटी तक करीब 250 मीटर नाला और उसके ऊपर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है। आरएमआरआइ और एनएमसीएच के पीछे भी नाला निर्माण का कार्य शुरू हो गया है।
उन्होंने बताया कि 15 जून से संभावित मानसून को देखते हुए दो किलोमीटर से अधिक हिस्से में नाला व सड़क निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। बकरी मंडी तक नाला निर्माण प्राथमिकता में रखा गया है।
परियोजना के तहत 3.53 किलोमीटर हिस्से में नाला के ऊपर सड़क बनेगी, जबकि 2.20 किलोमीटर तक खुला नाला रहेगा। नाला के ऊपर बनने वाली सड़क 14 मीटर चौड़ी फोरलेन होगी, जिसके दोनों ओर फुटपाथ भी बनाए जाएंगे।
सैदपुर की ओर से नाला पर बन रही सड़क
निर्माण कार्य को गति देने के लिए सैदपुर की ओर नाला का दूसरा डायवर्जन तैयार किया जा रहा है, ताकि मानसून से पहले रामपुर संप हाउस तक काम पूरा किया जा सके।
पहले डायवर्जन के तहत निर्धारित 400 मीटर में से लगभग 300 मीटर तक नाला निर्माण हो चुका है।
परियोजना निदेशक ने बताया कि नाला किनारे स्थित बिजली के पोल और ट्रांसफॉर्मरों को भी शिफ्ट किया जा रहा है। अब तक छह से अधिक ट्रांसफॉर्मर हटाए जा चुके हैं।
बकरी मंडी तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
एनएमसीएच के पीछे बन रहे नाला का काम भी मानसून से पहले पीजी छात्रावास के मुहाने तक पूरा करने की योजना है।
गायघाट से शनिचरा पुल तक लगभग 500 मीटर लंबा डक (डक्ट) बनाया जाएगा, जिसमें विद्युत ग्रिड और फीडरों के एचटी केबल सुरक्षित रखे जाएंगे। इससे भविष्य में रखरखाव कार्य भी आसान होगा।
उन्होंने बताया कि पहाड़ी से अगमकुआं रेलवे लाइन के पहले तक करीब 1200 मीटर खुले नाला का निर्माण पूरा हो चुका है।
रेलवे लाइन के नीचे नाला निर्माण के लिए अनुमति प्रक्रिया जारी है। वहीं, शनिचरा पुल के पास अतिक्रमित हिस्सों को चिन्हित कर लिया गया है और जल्द ही प्रशासन द्वारा इसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
इस परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ जलजमाव की समस्या से राहत मिलेगी, बल्कि इस पूरे इलाके में आवागमन भी काफी सुगम हो जाएगा।


