विदेशी और रंगीन सब्जियों की खेती से चुन लिया तरक्की का रास्ता, किसान राम पूरन चौधरी ने बदल दी यह धारणा

खेती घाटे का सौदा है, यह धारणा सदर ब्लाक क्षेत्र के चितरगढ़िया गांव के प्रगतिशील किसान राम पूरन चौधरी ने बदल दी है। विदेशी और रंगीन सब्जियों की खेती कर नई पहचान बना ली है। आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। अयोध्या में पर्यटन उद्योग के विस्तार और बड़े होटलों में विदेशी सब्जियों की बढ़ती मांग से प्रेरित होकर यह सफलता अर्जित की है।

शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर किसान राम पूरन ने करीब एक एकड़ खेत में 15 तरह विदेशी और रंगीन सब्जियों की खेती की है। लागत 63 हजार रुपये से तीन लाख रुपये की आय अर्जित की है। सब्जियों के कुछ बीज पूसा संस्थान नई दिल्ली से तो कुछ बीज उत्तराखंड के पंत नगर विश्वविद्यालय में आयोजित किसान मेले से क्रय किया और खुद ही नर्सरी तैयार कर पौधों की रोपाई अपने खेतों में की और अन्य किसानों को भी मुहैया कराया।

पांच रंगों की गोभी के साथ-साथ पार्सले, ब्रुसल्स स्प्राउट, ब्रोकली, लेट्यूस (सलाद पत्ता), स्विस चार्ड, लीक, पार्सनिप और लाल पत्ता गोभी जैसी विदेशी सब्जियों का उत्पादन किया। इन सब्जियों की नियमित आपूर्ति अयोध्या के होटलों में की जा रही है, जहां उन्हें अच्छी कीमत मिलती है। इसके इतर महज 40 हजार रुपये की लागत में तीन महीने में टमाटर की उन्नत खेती से करीब दो लाख अस्सी हजार की आय अर्जित की है।

राम पूरन का कहना है यदि किसान सही तकनीक और बाजार की मांग को समझ लें तो खेती सबसे सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय है। यह प्रेरणा उन्हें कृषि विशेषज्ञ बृहस्पति पांडेय से मिली है।

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