ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में नहीं सजा फूलबंगला, गर्मी में मायूस लौटे भक्त; भीड़ में जूझते हुए दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु

गर्मी के दिनों में भक्तों को उम्मीद रहती है कि ठाकुर बांकेबिहारीजी फूलबंगला में विराजमान होकर दर्शन देंगे। इसी उम्मीद लिए रविवार की दोपहर नंगे पैर करीब डेढ़ सौ मीटर भीड़ का दबाव व आपाधापी झेलते हुए श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में पहुंचे तो आराध्य बांकेबिहारी बिना फूलबंगला के भक्तों को दर्शन देते मिले।

मायूस मन और ठाकुरजी के दर्शन की इच्छा पूरी होने की खुशी के बीच जूझते श्रद्धालु अपने मन को समझाते और आराध्य के दर्शन का लाभ लेकर मंदिर से लौट रहे थे। ये हाल था वीकेंड के दूसरे दिन रविवार को। वहीं शनिवार को भी मंदिर में फूल बंगला नहीं सजाया गया। गर्मी में फूलबंगला के बिना आराध्य के दर्शन मिलने पर भक्तों में मायूसी दिख रही है।

सेवायत खुद तोड़ रहे मंदिर की परंपरा

ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में इस बार गर्मी में फूलबंगला की परंपरा लगातार टूट रही है। खास बात है कि वीकेंड में शनिवार को मंदिर फूलबंगला नहीं सज सके। रविवार को भी ठाकुरजी ने गर्मी के मौसम में बिना फूलबंगला के भक्तों को दर्शन दिए। भक्तों को मंदिर में फूलबंगला सजा दिखाई नहीं दिया तो श्रद्धालु मायूस नजर आए। जयपुर से आई महिला श्रद्धालु सुधा निर्मल ने कहा वे फूलबंगला में विराजे ठाकुरजी के दर्शन की इच्छा लेकर वृंदावन आए थे।

भीड़ के दबाव से श्रद्धालुओं को हुई मुश्किल, बच्चे-बुजुर्ग हुए परेशान

शनिवार को सोचा रविवार को फूलबंगला सजेगा, इसलिए हम एक दिन के लिए वृंदावन में ही ठहर गए। लेकिन, रविवार को मंदिर के एंट्री प्वाइंट से तेज धूप, भीड़ का दबाव और धक्का मुक्की झेलते हुए मंदिर प्रांगण में पहुंचे तो मायूसी हाथ लगी। रविवार को भी आराध्य का फूलबंगला नहीं सजा था। हालाकि इसके चलते दो दिन लगातार ठाकुरजी के दर्शन का फल तो मिल गया। यही सोचकर हम संतुष्ट हैं, जैसी बांकेबिहारीजी की इच्छा।

फूलबंगला नहीं सजा तो मायूसी हुई

इसी तरह हरियाणा के पंचकूला निवासी अशोक शर्मा अपने परिवार के साथ रविवार को दर्शन करने आए। अशोक शर्मा कहते हैं, हम गर्मी के दिनों में इसीलिए दर्शन को आते हैं कि एक तो ठाकुजी जगमोहन में विराजते हैं और फूलबंगला में सुंदर दर्शन होते हैं। लेकिन, रविवार को आराध्य के दर्शन का लाभ तो मिला। लेकिन, फूलबंगला नहीं सजा तो मायूसी हुई।

अशाेक शर्मा ने कहा, मंदिर सेवायतों और प्रबंधन को हर दिन फूलबंगला सजाने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। अगर कोई श्रद्धालु नहीं मिल रहा है, तो मंदिर सेवायत अथवा प्रबंधन खुद अपने खर्चे पर फूलबंगला सजाए। ताकि श्रद्धालुओं की इच्छा और आस्था को ठोस न पहुंचे।

रेलिंग के जरिए श्रद्धालुओं को हुए सुगम दर्शन

वहीं रविवार को मंदिर में तो रेलिंग के जरिए श्रद्धालुओं को सुगमता से ठाकुरजी के दर्शन हुए। लेकिन, बाहर गली में श्रद्धालुओं की भीड़ का दबाव बना रहा। बेरिकेडिंग पर रोके जाने पर श्रद्धालु खुद को असहज महसूस कर रहे थे। इसके कारण सर्वाधिक परेशानी महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को हुई।

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