ऑपरेशन सिंदूर अब आतंक के खिलाफ जंग में भारत की बदली रणनीति का प्रतीक बन चुका है। एक वर्ष पहले यह पहलगाम हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया भर नहीं थी, बल्कि नए भारत के उदय का शंखनाद था।
आपरेशन सिंदूर में हमारी सेनाओं ने यह साबित कर दिया कि वह भविष्य की लड़ाई के लिए न केवल तैयार है, बल्कि करार जवाब देने में भी सक्षम है। चीन और तुर्की की तकनीक व ड्रोन से लड़ रहे पाकिस्तान को तीन दिन में घुटने पर लाने के बाद भी हम थमे नहीं और एक साल में बड़े बदलाव लाकर सेना को आधुनिक, तकनीकी और बहुआयामी युद्ध के लिए तैयार कर लिया।
एक वर्ष में ड्रोन और ड्रोनरोधी अभ्यास हमारी सेनाओं का हिस्सा बन गए। एआइ तकनीक आधारित हथियार के साथ ड्रोन और इलेक्ट्रानिक वारफेयर अब युद्धकला का हिस्सा बन गए। हर सैनिक के लिए ड्रोन प्रशिक्षण अनिवार्य बना दिया दिया।
सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को घर में घुसकर मारने की क्षमता
अब हमारे जवान राइफल व तोप से ही आग नहीं उगलते, ड्रोन से सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को घर में घुसकर मारने की क्षमता रखते हैं। साइबर हमलों से निपटने में तत्पर हैं और सक्षम भी।
ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद दुनिया भर में चल रहे युद्धों से सीख लेते हुए हुमारी सेनाएं भविष्यों के युद्धों की चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी रूप से बेहतर बनाने में जुट गईं।
यही कारण है कि सेना ने एक साल में 50 नई यूनिटें, चार नई सैन्य फारमेशन बनाने के साथ अपने बेड़े में पांच लाख से अधिक आधुनिक हथियार, दो लाख से अधिक नई पीढ़ी के उपकरण शामिल कर अपनी तैयारी साबित कर दी। आज सेना की हर बटालियन अब ड्रोन से दुश्मन पर सटीक प्रहार करने के साथ दुश्मन के ड्रोन को हवा में मार गिराने वाले आधुनिक यंत्रों से लैस है।
रक्षा उत्पादन को नई ऊर्जा दी
नेतृत्व के स्तर पर नीतिगत तौर पर अधिक स्पष्टता और सजगता ने सेना की तैयारी को नई ऊर्जा दी। आपरेशन सिंदूर के बाद आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन को गति दी गई। साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, सूचना युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सैन्य क्षमताओं में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
स्वदेशी हथियार प्रणालियों, संचार उपकरणों व निगरानी तकनीकों के उपयोग ने यह सिद्ध हुआ कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम कर रहा है। देश के रक्षा क्षेत्र में उत्पादन में 174 प्रतिशत वृद्धि हुई व निर्यात में 34 गुणा वृद्धि हुई।
हम लंबी लड़ाई लड़ने में सक्षम: कर्नल विरेंद्र साही
वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के वीर चक्र विजेता कर्नल विरेंद्र साही का कहना है कि एक साल पहले हमारी सेना ने पहलगाम का बदला लेकर दुश्मन देश को तीन दिन में घुटने पर ला दिया था। न सिर्फ पाकिस्तान, अपितु पूरे विश्व को हमारी ताकत, क्षमता व इच्छाशक्ति का अंदाजा हो गया था।
इसके बाद हम रुके नहीं व सेना को भावी युद्ध के लिए तेजी से तैयार करते गए। आत्मनिर्भर भारत के पास आधुनिक हथियारों, गोला बारूद, तकनीकी उपकरणों का भंडार है। हम लंबी लड़ाइयां लड़ने में सक्षम हैं।
कभी न भूलने वाला सबक चखाया
कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर देवेंद्र कुमार का कहना है कि आपरेशन सिंदूर में दुश्मन को कभी न भूलने वाला सबक दिया गया। आधुनिक मिसाइलों व ड्रोन से दुश्मन पर सटीक प्रहार कर उसे रणनीतिक चेतावनी दी गई जिसका अच्छा आसार दिखा।
कुशल रणनीति से अंजाम दिए आपरेशन सिंदूर से विश्व को भारत की मजबूत सैन्य क्षमता व त्वरित निर्णय लेने की ताकत का भी अंदाजा हुआ। इसके बाद साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, सूचना युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सैन्य क्षमताओं को और सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया। सशस्त्र सेनाओं ने बेहतर समन्वय से आपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया।


