विवेक विहार अग्निकांड ने ताजा किए पालम हादसे के जख्म, एक परिवार ने खोए थे 9 सदस्य; फूट-फूटकर रोए राजेंद्र कश्यप

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विवेक विहार इलाका शनिवार रात उस समय दहल गया, जब एक चार मंजिला मकान भीषण आग की चपेट में आ गया। इस हृदयविदारक हादसे में नौ लोगों की झुलसने और दम घुटने से मौत हो गई है।

इस घटना ने डेढ़ माह पूर्व 18 मार्च की सुबह पालम के साधनगर राम चौक बाजार में हुए उस अग्निकांड के जख्मों को फिर से हरा कर दिया है, जिसमें एक ही परिवार के नौ सदस्यों की जान चली गई थी, जिसमें तीन मासूम बच्चे भी थे।

राजेंद्र कश्यप का छलका दर्द कहा नहीं बचे कंधा देने वाले लाल

रविवार सुबह जैसे ही विवेक विहार हादसे की खबर पालम पहुंची, 18 मार्च की त्रासदी में अपना सब कुछ खो चुके पालम बाजार के प्रधान राजेंद्र कश्यप फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि कड़ी मेहनत से एक-एक ईंट जोड़कर आशियाना बनाया था।

10 फीट की गहराई से मैने शुरुआत की थी, पर उस अग्निकांड ने उन्हें 20 फीट गहरे गड्ढे में धकेला ही नहीं दबा भी दिया बा। पांच बेटों और एक मन्नतों वाली बेटी के पिता रहे राजेंद्र आज खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। इस हादसे में उनके पांच में से तीन बेटे, बहु, बेटी, पत्नी और पोतियों की मौत हो गई। आज उन्हें कंधा देने वाले चार कंधे भी नहीं बचे हैं।

बाजार में रौनक लौटी, पर घर में पसरा है सन्नाटा

पालम के राम चौक बाजार में आज फिर 600 दुकानदार और 200 रेहड़ी-पटरी वाले अपने काम पर लौट आए हैं। जिंदगी की रफ्तार सामान्य हो गई है, लेकिन मकान संख्या डबल्यूजेड-124 आज भी उस काली रात की गवाह बनी हुई है। भले ही इसे चादरों से ढंक दिया गया हो, पर वहां से गुजरने वालों को आज भी बच्चों की वे किलकारियां याद आती हैं जो अब खामोश हो चुकी हैं।

राजेंद्र कश्यप का कहना है कि वे बाजार में आते हैं, पर उनकी उस ओर जाने की हिम्मत नहीं होती। वो कहते हैं कि समय के साथ दुनिया आगे बढ़ जाती है, पर अपनों को खोने वालों के लिए हर नया हादसा एक नई कयामत लेकर आता है।

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