नासिक के TCS के एक बीपीओ ऑफिस में सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर एक ऐसी कहानी चल रही थी, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया।
करीब एक महीने तक पुलिसकर्मी हाउसकीपिंग स्टाफ बनकर वहां काम करते रहे। जब सच सामने आया, तो 9 एफआईआर दर्ज हुईं, कई गिरफ्तारियां हुईं और इस पूरे मामले में HR मैनेजर निदा खान सबसे बड़े सवालों के घेरे में आ गईं।
कब हुई जांच की शुरुआत?
शुरुआत फरवरी में हुई एक शिकायत से, जिसमें एक युवती के परिवार ने आरोप लगाया कि उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आ गया है। पुलिस को शक हुआ कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कार्यस्थल से जुड़ा हो सकता है।
इसके बाद एक गुप्त योजना बनाई गई। पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर बीपीओ यूनिट में भेजा गया। वहां वे रोजमर्रा की गतिविधियों को देखते, लोगों के व्यवहार को समझते और हर जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाते। धीरे-धीरे जो तस्वीर सामने आई, उसने जांच को एक बड़े मामले में बदल दिया।
निदा खान पर क्यों टिक गई जांच?
जांच के दौरान सामने आया कि ऑफिस में काम करने वाली कई महिलाएं लंबे समय से परेशान थीं। लेकिन उनकी शिकायतें या तो दर्ज नहीं हुईं या उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहीं से एचआर मैनेजर निदा खान की भूमिका पर सवाल उठने लगे। उनकी जिम्मेदारी थी कि कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लें और कार्रवाई करें।
आरोप है कि उन्होंने न सिर्फ शिकायतों को नजरअंदाज किया, बल्कि कुछ मामलों में महिलाओं को चुप रहने के लिए भी कहा गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या उन्होंने जानबूझकर आरोपियों को बचाने में भूमिका निभाई।
एक-एक कर खुलते गए राज
मार्च में पहली एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें दानिश शेख पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगा। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और कई और महिलाएं सामने आईं। 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुल 9 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न, पीछा करना और धार्मिक दबाव जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, कई मामलों में महिलाओं ने आरोप लगाया कि अगर वे विरोध करती थीं, तो उन पर काम का दबाव बढ़ा दिया जाता था।
जांच के दौरान पुलिस को 78 ईमेल, चैट रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स मिलीं। इनसे पता चला कि शिकायतों की जानकारी एचआर तक पहुंच रही थी। निदा खान की कॉल डिटेल्स में भी आरोपियों से कई बार बातचीत सामने आई है।
पुलिस अब उनके बैंक खातों की भी जांच कर रही है, ताकि किसी तरह के लेन-देन का पता लगाया जा सके। SIT का मानना है कि ये सबूत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता भी हो सकता है।
कितने लोगों की हुई गिरफ्तारी?
अब तक इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें निदा खान भी शामिल हैं। उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या यह मामला किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है। हालांकि, अभी तक किसी संगठित साजिश के सबूत नहीं मिले हैं। इस पूरे मामले ने कार्यस्थल की सुरक्षा और नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
टीसीएस ने इस मामले में सभी आरोपित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और कहा है कि वह इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। वहीं, बचाव पक्ष का कहना है कि आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और सामान्य बातचीत को गलत तरीके से अपराध बताया जा रहा है।
अब क्या आगे?
नासिक बीपीओ केस अभी पूरी तरह खुला नहीं है। हर दिन जांच में नई जानकारी सामने आ रही है। एसआईटी अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या शिकायतों को लंबे समय तक दबाया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी। फिलहाल, इस पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बनी हुई हैं निदा खान, जिनकी भूमिका तय करेगी कि यह सिर्फ लापरवाही थी या कुछ और बड़ा।


