Delimitation: ओडिशा में 21 से बढ़कर 32 हो जाएंगी लोकसभा सीटें! चुनाव में महिलाओं को मिलेगा आरक्षण

केंद्र सरकार देश में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का फैसला कर सकती है। इसके लिए संसद के विशेष सत्र में “Delimitation Bill 2026” पेश होने जा रहा है। इस संबंध में सांसदों को एक ड्राफ्ट बिल भी सौंपा गया है।

इस प्रस्ताव के अनुसार, देश में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो सकती है। वहीं ओडिशा में लोकसभा सीटों की संख्या 21 से बढ़कर 31 या 32 तक पहुंचने की संभावना है।

इसी तरह विधानसभा सीटों में भी 73 या 74 सीटों की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कुल संख्या 220 या 221 हो जाएगी। सीटें बढ़ने की संभावना से राज्य के सभी राजनीतिक दलों में उत्साह देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” भी पेश किया जाएगा, जिसके तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान लागू होगा।

इसके साथ ही 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण व्यवस्था लागू करने और डिलिमिटेशन आयोग के गठन का प्रावधान भी इस बिल में शामिल है।

ओडिशा को अपेक्षाकृत अधिक सीटें मिलने की संभावना के कारण राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। किन लोकसभा सीटों का पुनर्गठन होगा, इस पर भी मंथन शुरू हो गया है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक भुवनेश्वर, कटक और केबीके (कालाहांडी-बालांगीर-कोरापुट) क्षेत्र में नई सीटें बनाई जा सकती हैं।

इन सीटों पर पड़ सकता है असर

आस्का, मयूरभंज और सुंदरगढ़ लोकसभा सीटों को विभाजित कर नई सीटें बनाई जा सकती हैं। लोकसभा सीटों के पुनर्गठन के बाद विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं भी दोबारा तय की जाएंगी। ऐसे में कई विधानसभा सीटों का पुनर्विभाजन संभव है।

विपक्ष में बढ़ी चिंता

2029 के आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया और महिला आरक्षण को लागू करने की तैयारी से विपक्षी दलों में चिंता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि जहां विपक्ष मजबूत है, वहां सीटों की सीमाओं में बदलाव और महिला आरक्षण के जरिए सियासी समीकरण बदले जा सकते हैं। साथ ही कुछ सीटों को SC/ST के लिए आरक्षित किया जा सकता है।

बीजेडी का रुख क्या होगा?

महिला आरक्षण बिल पर बीजेडी के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं। बीजेडी पहले से ही महिला सशक्तिकरण के समर्थन में रही है और लोकसभा चुनाव में 33 प्रतिशत सीटों पर महिला उम्मीदवार उतार चुकी है।

राज्यसभा में बीजेडी के संसदीय दल के नेता मानस मंगराज ने कहा कि पार्टी हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रही है। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने पंचायत चुनाव में 33 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत की थी, जिसे नवीन पटनायक ने बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया।

हालांकि, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले इस बिल को लाने के समय पर बीजेडी सवाल उठा सकती है और इस मुद्दे को संसद में भी उठा सकती है।

वहीं, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि राज्य में नई विधानसभा बनाई जाएगी, जिसमें 300 विधायकों के बैठने की व्यवस्था होगी। बीजेपी भी इस बिल के समर्थन में जोरदार प्रचार कर रही है और संसद में यह बताने की तैयारी कर रही है कि इससे ओडिशा को कैसे लाभ होगा।

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