दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) का उद्घाटन समारोह केवल विकास का उत्सव नहीं रहा, बल्कि यह देवभूमि की आध्यात्मिक शक्ति और जनविश्वास का विराट मंच भी बना।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में संत समाज ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड अब उस दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां
आस्था की ऊर्जा और विकास की गति साथ-साथ चल रही है। संतों ने कहा, जहां धर्म की धारा निर्बाध बहती है, वहीं समृद्धि का मार्ग स्वतः निर्मित होता है, और उत्तराखंड आज आस्था की शक्ति से विकास का नया अध्याय लिख रहा है।
प्रधानमंत्री द्वारा देहरादून में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) का उद्घाटन संत समाज ने केवल अधोसंरचना परियोजना नहीं, बल्कि देवभूमि की जीवनरेखा को नई रफ्तार देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।
सर्व संतों का कहना था कि इससे चारधाम, हरिद्वार, ऋषिकेश और सिद्धपीठ मां डाट काली तक पहुंच अधिक सुगम होगी और तीर्थाटन को नई ऊर्जा मिलेगी। उनके अनुसार यह मार्ग विकास और सनातन चेतना के बीच सेतु का कार्य करेगा। संतों ने कहा कि सरकार ‘तीर्थ से पर्यटन’ की अवधारणा को धरातल पर उतार रही है। चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन व संपर्क मार्गों के विस्तार से राज्य की अर्थव्यवस्था में नई जीवंतता आई है।
दिगंबर अखाड़ा हरिद्वार के संत राम विशाल दास ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली ने उत्तराखंड को विकास के ऐसे पथ पर आगे बढ़ाया है जहां प्रकृति, परंपरा व प्रगति तीनों का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि गंगा, हिमालय और हरित वन उत्तराखंड की आत्मा हैं, और इन्हें सुरक्षित रखते हुए विकास करना ही राज्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर इसका जीवंत उदाहरण है, जहां वन और वन्य-जीवों का पूरा ध्यान रखकर विकास किया गया है। वहीं, कलखल हरिद्वार के निर्मल संत जगजीत सिंह शास्त्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल धार्मिक चेतना का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक व सांस्कृतिक जागरूकता का भी प्रभावी उदाहरण बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में प्रदेश आध्यात्मिक पर्यटन व पर्यावरणीय संतुलन की नई राष्ट्रीय दिशा तय करेगा।
प्रकृति की गोद में विकास की नई लय
श्री निरालाधाम आश्रम हरिद्वार के महंत नित्यानंद ने कहा कि उत्तराखंड में आस्था और प्रकृति का जो अद्वितीय संतुलन है, वही इसकी सबसे बड़ी पहचान है। अब विकास की नई लहर इस भूमि को वैश्विक आकर्षण का केंद्र बना रही है। तीर्थाटन के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियां राज्य को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे ले जा रही हैं।
संत समाज बोला, यह आयोजन जनजागरण का प्रतीक
हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून से पहुंचे संतों ने कहा कि यह आयोजन केवल राजनीतिक उपस्थिति का मंच नहीं, बल्कि जनजागरण और सामाजिक विश्वास का संदेश है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के निर्देशन और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।


