जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने जम्मू में प्रदूषण नियंत्रण और कचरा प्रबंधन की खराब स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने जम्मू नगर निगम से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट (हलफनामा) दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
यह निर्देश एक जनहित याचिका राजिंदर सिंह बनाम राज्य व अन्य की सुनवाई के दौरान दिया गया। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस राजनेश ओसवाल की खंडपीठ ने की। न्यायालय ने टिप्पणी की कि वर्ष 2014 से इस मामले में कई आदेश दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर बहुत कम काम हुआ है।
अवैज्ञानिक तरीके से डंपिंग पर भी चिंता जताई
याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। बिना सही जांच के प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को एनओसी जारी की गईं और निगरानी में पारदर्शिता की कमी रही। न्यायालय ने जम्मू एयरपोर्ट के पास और तवी नदी किनारे कचरे के अवैज्ञानिक तरीके से डंपिंग पर भी चिंता जताई।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इससे पक्षियों के टकराने (बर्ड स्ट्राइक) का खतरा बढ़ सकता है। सुनवाई के दौरान नगर निगम आयुक्त डा. देवांश यादव को भी न्यायालय में उपस्थित होने को कहा गया।
उनसे विभिन्न मुद्दों पर जवाब लेने के बाद न्यायालय ने एक सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल 2026 को होगी, जिसमें कोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।


