जिले में दो दिनों से खनन माफिया के विरुद्ध छापेमारी के बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं है। दो करोड़ से अधिक जुर्माने के बाद भी खदानों में मनमानी पहले जैसे ही चल रही है। हर साल भीषण गर्मी के मौसम में जानलेवा पेयजल संकट से जूझने वाला जनपद इस बार गर्मी की शुरूआत में ही पीने के पानी के संकट से जूझने लगा है।
जीवनदायिनी केन नदी अभी से नाले में तब्दील होने लगी है। अभी से शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए केन नदी पर बने इंटक वेल सूखने लगे हैं। जानकार इन सबके पीछे एकमात्र बालू खनन को ही कारण बताते हैं। उधर लोगों की समस्याओं से बेखबर बालू माफिया धड़ल्ले से नियमों काे ताक पर बालू का अवैध खनन करने में जुटे हैं।
बालू माफिया कमाई का मोटा हिस्सा बांटकर नदियों का सीना चीर रहे हैं और नदियों की जलधारा में खुलेआम प्रतिबंधित भारी भरकम मशीनरी गरज रही है। बालू माफिया हौसले इतने बुंलद हो गए हैं कि वह खुलेआम प्रशासन को चुनौती देते हुए नदी की जलधारा पर अवैध पुल बनाकर बालू की अवैध निकासी कर रहे हैं।
जिले में इन दिनों करीब दो दर्जन से अधिक बालू की खदानें संचालित हैं और बालू खदानों में खुलेआम अवैध खनन का तांडव मचा हुआ है। अधिक से अधिक धन अर्जित करने की ललक में बालू माफिया निर्धारित खनन क्षेत्र को छोड़कर नदी की जलधारा पर भारी भरकम मशीनों के जरिए बालू की निकासी कर रहे हैं और सरकारी राजस्व के साथ ही पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
बालू खनन के मामले में जिले में चहुंओर तहलका मचा हुआ है। पैलानी क्षेत्र की खप्टिहाकलां, से लेकर सदर तहसील एवं बेंदा तक धड़ल्ले से अवैध खनन और ओवलोडिंग का खेल खेला जा रहा है।
पैलानी क्षेत्र में केन नदी पर चल रही सदर तहसील की मरौली खदान में सबसे ज्यादा अवैध खेल चल रहा है। बालू माफिया की फोकस जीवनदायिनी केन नदी से निकलने वाले लाल सोना पर विशेष तौर पर टिका रहता है।
बालू खदानों में चल रही अवैध खनन और ओवरलोडिंग की बयार के बीच जिम्मेदार अफसर वैसे तो अपनी आंखे मूदे रहते हैं और बालू माफिया से मिलने वाले हिस्से की दम पर मूक सहमति दिए रहते हैं। लेकिन खदान संचालकों के खिलाफ होने वाली शिकायतों के निस्तारण के नाम पर अफसरों की टीम बालू खदानों में मामूली जुर्माना लगाकर कार्रवाई की इतिश्री करने का ढोंग भी करते हैं।
देखा जाए तो बालू माफिया पर होने वाली जुर्माने की कार्रवाई सरकारी खजाने में ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित होती है। सूत्र बताते हैं कि जुर्माने से अधिक रकम तो प्रति माह बालू माफिया प्रशासनिक अफसरों की जी हुजूरी हासिल करने के लिए खर्च करते हैं।
सरकारी राजस्व को लाखों का नुकसान पहुंचाकर बालू माफिया और जिम्मेदार अधिकारी अपनी जेबें भरने में अधिक ध्यान देते हैं। खनिज अधिकारी राज रंजन कुमार बालू खनन का कहना है कि शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है और संयुक्त टीम के लोग समय समय पर बालू खदानों में छापामार कार्रवाई भी करते हैं।


