उत्तर भारत का नया ट्रांसपोर्ट हब बना दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर, होंगे ये पांच बड़े फायदे

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 दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (आर्थिक गलियारा) की सबसे बड़ी खासियत इसकी मल्टी-एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी है।

यह परियोजना केवल दिल्ली और देहरादून को जोड़ने तक सीमित न है, बल्कि यह उत्तर भारत के कई प्रमुख राष्ट्रीय और प्रस्तावित एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़कर एक इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट (एकीकृत परिवहन) ग्रिड तैयार करती है। क्योंकि, जब एक ही कॉरिडोर कई राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे से जुड़ता है, तो वह केवल सड़क नहीं रहता, बल्कि मल्टी-नोड ट्रांसपोर्ट हब बन जाता है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से रणनीतिक कनेक्शन

यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के माध्यम से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ता है, जो देश का सबसे बड़ा और सबसे महत्वाकांक्षी एक्सप्रेसवे नेटवर्क माना जाता है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे उत्तर भारत को पश्चिमी भारत के औद्योगिक और वित्तीय केंद्रों जैसे-जयपुर, कोटा, वडोदरा, सूरत और मुंबई से जोड़ता है।

इसका सीधा फायदा यह होगा कि देहरादून और उत्तराखंड से आने वाले कृषि उत्पाद/अन्य उत्पाद, पर्यटन यातायात, औद्योगिक लाजिस्टिक्स आसानी से मुंबई कॉरिडोर तक पहुंच सकेंगे। इससे उत्तराखंड के उद्योगों को राष्ट्रीय सप्लाई चेन से जोड़ने में बड़ी मदद मिलेगी।

उत्तराखंड से वैष्णो देवी क्षेत्र तक मिलेगी बेहतर सुविधा

दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे (जिसे दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे भी कहा जाता है) उत्तर भारत के धार्मिक और सामरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी मिलने का अर्थ है कि देहरादून, हरिद्वार, चारधाम और जम्मू–कटरा के बीच धार्मिक पर्यटन का एक मजबूत हाई-स्पीड नेटवर्क तैयार होगा। जिससे तीर्थयात्रियों को उत्तराखंड से वैष्णो देवी क्षेत्र तक यात्रा में बड़ी सुविधा मिलेगी।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से रणनीतिक लिंक लाभ का सौदा

दिल्ली–देहरादून कॉरिडोर का सबसे व्यावहारिक लिंक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईपीई) के जरिए बनता है। यह लिंक एनसीआर ट्रैफिक को तीन दिशाओं मेरठ, देहरादून और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बांटता है। इससे दिल्ली के अंदर ट्रैफिक दबाव कम होगा और मालवाहक यातायात को वैकल्पिक हाई-स्पीड रूट मिलेगा।

प्रस्तावित शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे से पूर्वी उत्तर प्रदेश तक सीधा मार्ग

यह भविष्य की सबसे बड़ी कनेक्टिविटी में से एक है।शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे पश्चिमी यूपी को सीधे पूर्वी यूपी से जोड़ेगा। जिसके बाद देहरादून-दिल्ली कॉरिडोर से निकलकर यातायात सीधे बरेली, लखनऊ बेल्ट, गोरखपुर और पूर्वांचल क्षेत्र तक पहुंचेगा। जिसके बाद लाजिस्टिक्स, कृषि परिवहन और औद्योगिक माल ढुलाई में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

हरिद्वार स्पर से धार्मिक और पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ होगी मजबूत

हरिद्वार स्पर (एसपीयूआर/मुख्य मार्ग को जोड़ने वाले लिंक मार्ग) इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन लिंक है। यह मुख्य कॉरिडोर से निकलने वाली 50.7 किमी लंबी शाखा सड़क (स्पर रोड) है, जो रुड़की, हरिद्वार, चारधाम मार्ग को जोड़ती है। इससे कांवड़ यात्रा, कुंभ मेला, चारधाम यात्रा, वीकेंड धार्मिक पर्यटन आदि को विशेष लाभ मिलेगा। यह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सीधे पर्यटन निवेश को बढ़ाएगा।

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