आईटी सेक्टर में इन दिनों वर्क कल्चर को लेकर एक के बाद एक विवाद सामने आ रहे हैं। इसमें सबसे पहले टीसीएस फिर इन्फोसिस और अब टेक महिंद्रा सुर्खियों में है। दरअसल, ताजा मामला तब शुरू हुआ जब X पर बॉम्बे हाई कोर्ट के वकील आशुतोष के. दुबे की एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट वायरल हुआ। पोस्ट में दावा किया गया कि मुंबई के गोरेगांव स्थित ऑफिस की कैंटीन को रमजान के दौरान नमाज और इफ्तार के लिए फुटवियर फ्री जोन घोषित किया गया था।
हालांकि, कंपनी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। टेक महिंद्रा का कहना है कि आंतरिक जांच में ये दावे पूरी तरह गलत और बेबुनियाद पाए गए हैं। कंपनी ने साफ कहा कि वह धर्म के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करती और सभी कर्मचारियों के लिए समान और सम्मानजनक माहौल देने के लिए प्रतिबद्ध है।
टीसीएस यौन उत्पीड़न मामले में हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां
मालूम हो कि इस विवाद में सबसे पहले TCS का नासिक मामला चर्चा में आया था। यहां कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न, डराने-धमकाने और धार्मिक मामलों में जबरदस्ती जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतों के आधार पर 9 FIR दर्ज की गई। पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए NIA, ATS और राज्य की खुफिया एजेंसियों से भी संपर्क किया। अब तक 6 कर्मचारियों और एक AGM को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी महिला अभी फरार है। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ सीनियर कर्मचारी जूनियर्स को निशाना बना रहे थे।
इन्फोसिस पुणे विवाद में कंपनी ने दोहराई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
इसी कड़ी में इन्फोसिस का नाम भी बाद में जुड़ गया। पुणे स्थित BPM यूनिट को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट सामने आई, जिनमें महिला कर्मचारियों के साथ गलत व्यवहार के आरोप लगाए गए। हालांकि बाद में ये पोस्ट हटा दी गई, लेकिन मामले ने तूल पकड़ लिया था। इसके बाद इन्फोसिस ने बयान जारी कर कहा कि, वह उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाती है। कंपनी के मुताबिक, हर शिकायत की स्वतंत्र जांच की जाती है और कर्मचारियों को खुलकर अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाता है।


