दिल्ली से लगे यूपी के सबसे बड़े औद्योगिक नगर, नोएडा में 13 अप्रैल को श्रमिकों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर जमकर बवाल काटा था। इसके बाद यूपी सरकार ने प्रदर्शनकारी श्रमिकों की मांग पर बड़ा फैसला लिया है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय समिति ने नोएडा फेज 2 में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद के श्रमिकों के लिए अंतरिम न्यूनतम मजदूरी में लगभग 21% की वृद्धि की है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, केंद्र सरकार नए श्रम संहिता के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की प्रक्रिया में है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सभी राज्यों में एक समान आधारभूत वेतन तय करना है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि वह नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संघों सहित हितधारकों से परामर्श कर रही है और अंतिम निर्णय लेने से पहले सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा कर रही है।
मासिक वेतन की नई संरचना
नोएडा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के अनुसार,
गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों के मासिक अंतरिम वेतन में 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया गया है।
अर्ध-कुशल श्रमिकों को 12,445 रुपये के बजाय 15,059 रुपये मिलेंगे, जबकि कुशल श्रमिकों का वेतन 13,940 रुपये से बढ़ाकर 16,868 रुपये कर दिया गया है। संशोधित दरें 1 अप्रैल से प्रभावी हैं।
अन्य नगर निगम वाले जिलों में 15 प्रतिशत और शेष जिलों में मजदूरी की अंतरिम दरें लगभग 10 प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय़ लिया गया है।
- नगर निगम वाले जिलों में अकुशल श्रमिकों के लिए अंतरिम मासिक वेतन 13,006 रुपये होगा।
- अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये निर्धारित।
- अन्य जिलों में अकुशल श्रमिकों के लिए वेतन बढ़ाकर 12,356 रुपये होगा।
- अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए 13,591 रुपये होगा।
- कुशल श्रमिकों के लिए 15,224 रुपये कर दिया गया है।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियोक्ताओं से समय पर वेतन भुगतान, ओवरटाइम मुआवजा, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों सहित वेतन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
नोएडा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय ने सोशल मीडिया पर चल रही उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी 20,000 रुपये प्रति माह तय कर दी गई है। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, इन अफवाहों को “मनगढ़ंत और झूठा” बताया गया है। उन्होंने जनता से अपील की कि सोशल मीडिया पर वेतन संबंधी गलत आंकड़े प्रसारित होने के मद्देनजर वे केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।


