देश की राजधानी दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में मिट्टी की सेहत को लेकर बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। पर्यावरण थिंक टैंक ”टाॅक्सिक्स लिंक” की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली एवं एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में भी बैटरी रीसाइक्लिंग इकाइयों के आसपास की मिट्टी लेड (सीसा) से बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से दिल्ली और उसके आसपास के उन इलाकों को शामिल किया गया है जहां बैटरियों का पुनर्चक्रण होता है। अध्ययन के सबसे डराने वाला पहलू यह है कि जांच के लिए नमूने उन जगहों से लिए गए जो प्राथमिक स्कूलों, स्थानीय समुदायों और रिहायशी बस्तियों के बेहद करीब हैं।
मिट्टी के नमूनों में लेड की मात्रा 43,800 पीपीएम
मिट्टी के नमूनों में लेड की मात्रा 43,800 पीपीएम तक दर्ज की गई। पर्यावरण संरक्षण (दूषित स्थलों का प्रबंधन) नियम, 2025 के अनुसार 5000 पीपीएम से अधिक लेड वाली जगह को ”अत्यधिक खतरनाक” माना जाता है। यानी कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर तय सीमा से आठ गुना ज्यादा है।
रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के आसपास की कई इकाइयों में बैटरी के कचरे और एसिड को सीधे ज़मीन पर फेंका जा रहा है, जो सीधे तौर पर यहां के भूजल को जहरीला बना रहा है।
अध्ययन में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि दिल्ली के आसपास काम कर रही सरकारी मान्यता प्राप्त इकाइयों के पास मिट्टी में लेड का औसत स्तर, अवैध रूप से चल रही इकाइयों से भी अधिक पाया गया। यह सीधे तौर पर माॅनिटरिंग और प्रवर्तन की भारी विफलता को दर्शाता है।


