‘मिडिल ईस्ट में नहीं मिलेगी सुरक्षित पनाह’, मोजताबा खामेनेई की अमेरिका को खुली चुनौती

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ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने मंगलवार को अमेरिका को चेतावनी दी है। मोजताबा ने कहा कि अब इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

खामेनेई ने ‘अमेरिका का नाश हो’ और ‘इजराइल का नाश हो’ के नारों को इस्लामी दुनिया की एकजुटता का प्रतीक बताते हुए इन्हें दुनिया भर के दबे-कुचले लोगों का नारा बनाने की अपील की।

एक्स पर जारी किया गया बयान

खामेनेई के कार्यालय ने एक्स पर फारसी भाषा में पोस्ट कर कहा, ‘समय का पहिया पीछे नहीं घूमता। मिडिल ईस्ट के देश अब अमेरिकी ठिकानों के लिए ढाल नहीं बनेंगे।

अमेरिका को इस क्षेत्र में साजिशें रचने और ठिकाने बनाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं मिलेगी।’ पोस्ट में कट्टरपंथी तेवर दिखाई दिया।

नेता ने मुस्लिम जगत से अपील की कि वे चल रहे हज के मौसम को अमेरिका और इजरायल के खिलाफ वैश्विक विरोध का मौका बनाएं।

पिता की शहादत का जिक्र

मोजतबा ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की शहादत का जिक्र करते हुए इसे ‘दैवीय पुनरुत्थान’ बताया है। अली खामेनेई की हत्या इस साल 28 फरवरी को ईरान में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में हुई थी।

56 साल के मोजतबा खामेनेई को पिता की हत्या के बाद ईरान का तीसरा सर्वोच्च नेता चुना गया था। हमलों में वे भी घायल हुए थे और उसके बाद सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।

इस्लामी एकजुटता की अपील

खामेनेई ने सभी इस्लामी देशों से एकजुट होकर ‘नई इस्लामी सभ्यता’ बनाने की अपील की है। उन्होंने ईरानी तीर्थयात्रियों से कहा कि वे ‘तीसरे थोपे गए युद्ध’ की जीत की कहानी अन्य मुस्लिम भाई-बहनों को सुनाएं और फिलिस्तीन और अल-अक्सा मस्जिद की मुक्ति साथ ही अमेरिका के खिलाफ अंतिम जीत के लिए प्रार्थना करें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष-विराम को लेकर बातचीत बेहद धीमी गति से चल रही है।

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