अमेरिका राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ डील की घोषणा की अटकलों के बीच इजरायल कार्ड चला है। उनका कहना है कि ईरान के साथ समझौता तभी पूरा माना जाएगा जब अरब-मुस्लिम देश अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होंगे। इन मुस्लिम देशों में सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किए, मिस्त्र, जॉर्डन और बहरीन शामिल हैं।
ट्रंप का साफ कहना है कि इन मुस्लिम देशों को इजरायल के साथ रिश्ते जोड़ने होंगे। ट्रंप ने चेताया कि जो देश ऐसा नहीं करेंगे उन्हें ईरान-अमेरिका डील का हिस्सा नहीं होना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि डील के बाद ईरान को भी अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल करना सम्मान की बात होगी। अब्राहम अकॉर्ड्स में अरब-मुस्लिम देशों के आने से पश्चिम एशिया में 5 हजार साल में पहली बार शांति आएगी।
क्या है अब्राहम अकॉर्ड्स, किसने शुरू किया?
ये ट्रंप के पहले कार्यकाल में शुरू हुआ। इसका मकसद अरब-मुस्लिम देशों का इजरायल से रिश्ते सामान्य करना हैं। ट्रंप इसे शांति का मॉडल बताते हैं। ट्रंप ईरान डील को सिर्फ युद्ध रोकने वाला समझौता नहीं रखना चाहते। वे इसे पश्चिम एशिया की नई राजनीतिक व्यवस्था बनाना चाहते हैं। इसलिए सऊदी, कतर, पाक, तुर्किये जैसे देशों पर जुड़ने का दबाव दे रहे हैं।
अब्राहम अकॉर्ड्स की एंट्री क्यों अहम?
इससे ईरान डील आसान होगी या मुश्किल… दोनों संभावनाएं हैं। अगर ये देश साथ आते हैं तो डील ऐतिहासिक दिखेगी लेकिन वे इजरायल से रिश्ते जोड़ने में हिचकते हैं तो ईरान समझौता उलझेगा।
इससे इजरायल को क्या फायदा होगा?
इजरायल को स्वीकृति मिलेगी। जिन देशों ने अब तक दूरी बनाए रखी है उनके अकॉर्ड्स में आने पर इजरायल का कूटनीतिक घेरा मजबूत होगा। व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय गठजोड़ के नए रास्ते खुलेंगे।
‘अभी डील होती नहीं दिख रही’
इन सब के बीच ईरान ने कहा कि कई मुद्दों पर निष्कर्ष निकले हैं पर अभी अमेरिका से समझौता होता हुआ नहीं दिख रहा है। वहीं, अमेरिका ने कहा कि डील में प्रगति हुई है, लेकिन ट्रंप जल्दबाजी नहीं करेंगे।


