लखीसराय में पंचायत के विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल, 6 हजार से अधिक योजनाएं अधूरी

 जिले की ग्राम पंचायतों में विकास योजनाओं की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। वर्ष 2025-26 में 76 पंचायतों में हजारों योजनाएं लिए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में योजनाएं अधूरी रह गईं, जिससे पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की गति पर सवाल उठने लगे हैं।

ग्राम पंचायतों के विकास के लिए हर वर्ष वार्षिक कार्ययोजना तैयार कर उसे ग्राम सभा से पारित किया जाता है और सभी योजनाओं को ई-ग्राम पोर्टल पर अपलोड कर आनलाइन मानिटरिंग की जाती है। इसके बावजूद धरातल पर अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही है।

आंकड़ों के अनुसार, छठे वित्त आयोग के तहत 2,865 योजनाएं ली गईं, जिनमें मात्र 278 योजनाएं ही पूर्ण हो सकीं। इन पर कुल 39 करोड़ 89 लाख 34 हजार रुपये खर्च किए गए। वहीं, 15वें वित्त आयोग के तहत 5,104 योजनाएं ली गईं, लेकिन इनमें सिर्फ 32 योजनाएं ही पूरी हो पाईं, जिस पर 34 करोड़ 52 लाख 95 हजार रुपये खर्च हुए।

वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद भी जिले की 76 पंचायतों में कुल 6,031 योजनाएं अधूरी रह गईं। 31 मार्च तक पंचायत विकास मद में लगभग 75 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि करीब 9 करोड़ रुपये अब भी पंचायतों के खाते में पड़े हुए हैं।

हालांकि, पंचायतों में गली-नाली, पीसीसी सड़क, आरसीसी नाला, चापाकल और भवन निर्माण जैसे कार्य किए गए हैं, जिससे गांवों की तस्वीर में कुछ बदलाव जरूर आया है। लेकिन अधूरी योजनाओं की बड़ी संख्या विकास कार्यों की धीमी गति को दर्शाती है।

प्रखंडवार स्थिति पर नजर डालें तो सूर्यगढ़ा प्रखंड में सबसे अधिक 804 योजनाएं ली गईं, जिनमें 43 पूर्ण और 320 निर्माणाधीन हैं। यहां 12 करोड़ 76 लाख 61 हजार रुपये खर्च हुए। बड़हिया में 467 में से 89 योजनाएं पूरी हुईं, जबकि चानन में 432 में से सिर्फ 9 योजनाएं ही पूरी हो सकीं।

हलसी में 421 में 95 योजनाएं पूर्ण हुईं, वहीं लखीसराय प्रखंड में 329 में से 24 योजनाएं ही पूरी हो पाईं। पिपरिया प्रखंड में 159 में से 8 और रामगढ़ चौक में 263 में से मात्र 10 योजनाएं पूरी हुईं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अधिकांश योजनाएं अभी निर्माणाधीन या अधूरी हैं।

अब नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में पंचायतों को सातवें और 16वें वित्त आयोग के तहत राशि दी जाएगी। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अधूरी योजनाओं को पूरा कर विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी।

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