प्रदेश में वनभूमि अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है।
अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे न्यायालयों में लंबित मामलों के संबंध में धरातल पर सटीक निगरानी संभव हो सकेगी। वहीं, प्रदेश में अब तक 1560.31 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जा चुका है।
विशेष सचिव एवं वन अतिक्रमण अभियान के नोडल अधिकारी डा पराग मधुकर धकाते की अध्यक्षता में सचिवालय में गुरुवार को बैठक आयोजित हुई। इस दौरान बताया गया कि वर्ष 2018-19 में राज्य में 11,396.64 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमित थी। जून 2024 से शुरू अभियान के तहत 31 मार्च, 2026 तक 1,560.31 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य इस कार्रवाई को और तेज करना है।
बैठक में उन्होंने सभी प्रभागीय वन अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के आंकड़ों का सत्यापन करने और किसी भी विसंगति को तुरंत दूर करें। उन्होंने अधिकारियों को भारतीय वन अधिनियम के तहत प्राप्त न्यायिक शक्तियों का प्रभावी उपयोग करते हुए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने को कहा गया।
अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की गई कि वे फील्ड स्तर के अनुभवों के आधार पर सुझाव दें, ताकि अभियान को और अधिक परिणामोन्मुख बनाया जा सके। बैठक में मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल धीरज पांडेय, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डा तेजस्विनी पाटिल समेत वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


