इंडोनेशिया और जापान के रिश्तों में बढ़ेगी गर्माहट, चिड़ियाघर में साथ दिखेंगे ‘कोमोडो ड्रैगन’

इंडोनेशिया और जापान के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत इंडोनेशिया जापान को विलुप्तप्राय कोमोडो ड्रैगन का एक जोड़ा देगा। यह समझौता 29 अप्रैल को दोनों देशों के चिड़ियाघरों के बीच हुआ, जिसका मकसद संरक्षण को बढ़ावा देना बताया गया है।

इस पांच साल के समझौते को आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इसके तहत इंडोनेशिया के सुराबाया चिड़ियाघर को जापान के शिजुओका प्रांत के आईजू से रेड पांडा, जिराफ, एल्डाब्रा के विशाल कछुए और दो मादा जापानी मकाक मिलेंगे। आईजू के निदेशक त्सुयोशी शिरावा ने कहा कि यह सिर्फ जानवरों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच एक मजबूत रिश्ता बनाने का प्रयास है।

पेटा ने जताई आपत्ति

इंडोनेशिया के पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लंबे समय तक वन्यजीव संरक्षण है। हालांकि, पशु अधिकार संगठन पेटा एशिया ने इस समझौते पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि जापान में पैदा होने वाले ड्रैगन कैद में ही जीवन बिताने को मजबूर होंगे। पेटा एशिया के अध्यक्ष जेसन बेकर ने कहा कि असली संरक्षण वहीं है, जहां ये जीव अपने प्राकृतिक आवास में रहते हैं, न कि उन्हें बाहर भेजकर।

इंडोनेशिया सरकार ने स्पष्ट किया कि कोमोडो ड्रैगन का संरक्षण उनके प्राकृतिक आवास में ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अधिकारियों का कहना है कि इस समझौते से जापान के लोग और पर्यटक इंडोनेशिया के कोमोडो नेशनल पार्क में आकर इन जीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देख सकेंगे। यह समझौता अंतरराष्ट्रीय नियमों (CITES) के तहत किया गया है, जो विलुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार को नियंत्रित करता है।

घटती संख्या और खतरे

कोमोडो ड्रैगन दुनिया की सबसे बड़ी छिपकली है, जो केवल कोमोडो नेशनल पार्क और फ्लोरेस द्वीप के आसपास पाई जाती है। 2019 के आंकड़ों के अनुसार, इनकी संख्या करीब 3458 रह गई थी। ये जीव इंसानी गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण खतरे में हैं। कई जगह इनके शिकार की कमी हो रही है, और कभी-कभी इंसानों के साथ संघर्ष में भी इनकी मौत हो जाती है। कुछ मामलों में इन्हें पकड़कर अवैध रूप से बेचा भी जाता है।

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