दक्षिण भारतीय व्यंजनों की बात ही कुछ और है, और इन्ही में से एक बेहद खास और मशहूर पारंपरिक डिश है- ‘अवियल’।
मुख्य रूप से केरलम और तमिलनाडु से जुड़ी यह डिश वास्तव में सब्जियों की एक गाढ़ी और बेहद स्वादिष्ट करी होती है। अगर आप खाने के शौकीन हैं, तो इस व्यंजन का स्वाद और इसके पीछे की दिलचस्प कहानी आपको जरूर जाननी चाहिए।
नाम में ही छिपा है इसका अर्थ
‘अवियल’ शब्द का मतलब ही होता है- एक ही डिश में कई सारी चीजों का मिला-जुला रूप। अपनी इसी खासियत के कारण इसे यह नाम मिला है। इसे तैयार करने में आमतौर पर 10 से 12 अलग-अलग तरह की ताजी सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है। इस बेहतरीन करी में कच्चा केला, जिमीकंद, लौकी, गाजर, बीन्स, बैंगन, सहजन और परवल जैसी पौष्टिक सब्जियां डाली जाती हैं। इसके स्वाद को दोगुना करने के लिए इसमें नारियल और ताजे कढ़ी पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है, और अंत में नारियल के तेल से इसे एक खास सुगंध और स्वाद दिया जाता है।
हर शहर का अपना एक अलग अंदाज
यह व्यंजन दक्षिण भारत के लोगों के रोजमर्रा के जीवन का अहम हिस्सा है। जहां केरलम में इसे मेन कोर्स के रूप में खाना अनिवार्य माना जाता है, वहीं तमिलनाडु में इसे खास तौर पर दोपहर के खाने के साथ परोसा जाता है। दिलचस्प बात यह है कि अलग-अलग क्षेत्रों में इसे बनाने के तरीके में भी थोड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। जैसे, कोझिकोड इलाके के लोग अपने अवियल में थोड़ा कड़वापन लाने के लिए ‘करेला’ भी मिलाते हैं, जबकि कोल्लम क्षेत्र में इस डिश को बनाते समय इसमें ‘टमाटर’ का यूज किया जाता है।


