जिले में रसोई गैस किल्लत को लेकर उपभोक्ता परेशान हैं। रोजाना गैस एजेंसियों पर घंटों इंतजार के बाद सैकड़ों लोगों को खाली सिलिंडर लेकर वापस घर लौटना पड़ता है। कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर के अभाव से कई औद्योगिक इकाइयां भी प्रभावित है।
ऐसे हालात में शहर के भीगो स्थित श्मशान घाट में घरेलू गैस सिलिंडर का प्रयोग कर शव के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया नगर निगम कर्मी संपन्न करा रहे हैं। इसे देख लोग आश्चर्यचकित ही नहीं हो रहे बल्कि, आक्रोश भी व्यक्त कर रहे हैं।
घरेलू गैस सिलिंडर का दूसरा प्रयोग प्रतिबंधित है। ऐसे में दरभंगा नगर निगम गैस आधारित शवदाह प्लांट में इसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है, यह बताने को कोई तैयार नहीं है। हालांकि, वाहवाही लेने वाले कई सफेदपोश आगे हैं।
शवदाह प्लांट के बगल में बने 18 कनेक्शन प्वाइंट में बुधवार को चार रसोई गैस सिलिंडर लगा मिला। जबकि, शेष प्वाइंट खाली थे। यहां निगम के द्वारा शवदाह कार्य के लिए पांच कर्मी महेंद्र महतो, राजीव कुमार, सुनील मल्लिक, संजय महतो एवं किशोरी सहनी तैनात हैं।
इनका कहना है कि मेरा काम शव जलाना है, रसोई गैस सिलिंडर कहां से आता है, इसकी जानकारी नहीं है। गैस प्लांट से एक शव जलाने में करीब 90 मिनट लगता है। इस दौरान 14 लीटर वाली दो रसोई गैस सिलिंडर की खपत होती है। इसका उपयोग लावारिस शवों को जलाने में अधिक करने की बात कही।
आम लोगों के लिए निगम के द्वारा मुफ्त में शवदाहगृह की सुविधा दी गई है। सिर्फ शव जलाने वाले स्वजन को गैस सिलिंडर उपलब्ध कराना होता है। हालांकि, शवदाहगृह में लकड़ी और उपले पर शव जलाने के लिए शेड भी बना है। जहां एक साथ सात स्थल बना है।
सूत्र बताते हैं कि अरसे से शवदाहगृह में रसोई गैस की धड़ल्ले से ख्रपत हो रही है। किल्लत भरे माहौल में दोगुने दाम में 14 लीटर का रसोई गैस सिलिंडर की खरीद बिक्री होती है।
एक महीने में करीब 25-30 शव जलाया जाता है। जिसमें से करीब 10 से 15 शव गैस प्लांट में जलाया जाता है। इसके लिए महीने भर में 50 से अधिक रसोई गैस सिलिंडर खर्च हो रहा है।
दरभंगा नगर निगम के उपनगर आयुक्त जयचंद अकेला ने कहा कि श्मशान घाट में कौन-से सिलिंडर प्रयोग हो रहा है यह संज्ञान में नहीं है। कर्मियों से जानकारी ली जा रही है।


