भारत-नेपाल सीमा पर चितवन निकुंज के घने जंगलों में स्थित भगवान श्रीराम से जुड़े पौराणिक स्थल वाल्मीकि आश्रम तक पहुंच अब आसान होने जा रही है। गंडक नदी पर नेपाल सरकार द्वारा छह वर्ष पूर्व बनाए गए झूला पुल से आवागमन लंबे समय से कानूनी जटिलताओं के कारण बंद था।
हालांकि, स्थानीय लोगों ने श्रमदान कर झूला पुल से आश्रम तक पैदल मार्ग भी तैयार कर लिया था, फिर भी आवाजाही शुरू नहीं हो सकी थी।
इस कारण नेपाल के श्रद्धालुओं को वाल्मीकिनगर के गंडक बराज होते हुए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के जंगलों से होकर लंबा और कठिन रास्ता तय करना पड़ता था। इससे लोगों में लगातार नाराजगी बढ़ रही थी। स्थानीय निवासियों के इसी जनाक्रोश को देखते हुए मंगलवार को प्रशासन हरकत में आया और उच्चस्तरीय निरीक्षण किया गया।
चितवन जिले के जिलाधिकारी गणेश अर्याल, पूर्वी नवलपरासी के जिलाधिकारी चिरंजीवी राना, चितवन राष्ट्रीय निकुंज के संरक्षण अधिकृत गणेश पंत तथा सुरक्षा निकाय के अधिकारियों ने झूला पुल और उससे जुड़े पहुंच पथ का जायजा लिया। अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण कर मौजूदा स्थिति का आकलन किया और आवश्यक सुधारों पर चर्चा की।
बैठक में बनी सहमति, तय हुई तारीख
निरीक्षण के बाद वाल्मीकि आश्रम में चितवन और पूर्वी नवलपरासी के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय निकायों के प्रमुखों के साथ बैठक आयोजित की गई। माणी नगरपालिका और विनयी त्रिवेणी गांव पालिका के प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया।
माणी नगरपालिका के वार्ड संख्या एक के अध्यक्ष अमित लामा ने बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 15 अप्रैल, यानी नेपाल के नववर्ष के दिन से झूला पुल के जरिए वाल्मीकि आश्रम तक आवागमन शुरू कर दिया जाएगा।
इस अवसर पर सभी संबंधित निकायों के प्रमुखों की उपस्थिति में विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि पुल के संचालन से जुड़ी सभी आवश्यक प्रशासनिक और सुरक्षा प्रक्रियाएं 15 अप्रैल से पहले पूरी कर ली जाएंगी, ताकि उद्घाटन के दिन किसी प्रकार की बाधा न आए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी अर्याल ने सीता माता के धरती प्रवेश स्थल, हरिहर मंदिर सहित अन्य पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों का भी अवलोकन किया। उन्होंने इन स्थलों के संरक्षण और विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
साथ ही श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए माणी नगरपालिका द्वारा वाल्मीकि आश्रम में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत एक मई से पहले बोरिंग का कार्य पूरा कर पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वाल्मीकि आश्रम में रहने वाले लोगों को जल्द से जल्द आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। झूला पुल के शुरू होने से न केवल श्रद्धालुओं की परेशानी कम होगी, बल्कि इस क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


