हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल भाजपा ने विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष ने नियम 67 के तहत दिया स्थगन प्रस्ताव दिया था। पंचायत चुनावों को लेकर जिला उपायुक्तों को 5 प्रतिशत आरक्षण रोस्टर तय करने की शक्ति देने के फैसले के खिलाफ काम रोको प्रस्ताव दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के बाद इस पर विचार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र के दौरान इसको लेकर रूलिंग दी थी कि पहले प्रश्काल होगा उसके बाद काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा होगी व उसी दिन जवाब भी आ जाएगा।
विपक्ष ने किया विरोध
विपक्ष इस पर चर्चा के लिए अड़ा रहा। विपक्षी विधायक अपनी जगह खड़े हुए और विरोध जताना शुरू कर दिया। सीएम ने अपनी बात रखने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से कहा। अध्यक्ष ने अनुमति दी तो विपक्ष ने विरोध किया।
स्थगित की कार्यवाही
सदन में भारी शोरगुल व हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही सुबह 11.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद फिर से कार्यवाही शुरू हुई।
भाजपा विधायकों का प्रदर्शन
शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विधानसभा परिसर में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी विधायक दल ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। कांग्रेस सरकार ने जिला उपायुक्त को रोस्टर में पांच फीसदी तक बदलाव के संबंध में नोटिफिकेशन जारी की है।c
जानबूझकर की जा रही देरी
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि चुनावों से जुड़े आरक्षण रोस्टर में जानबूझकर देरी की जा रही है। सरकार चुनाव टालने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रही है और मुख्यमंत्री अपनी जिद्द पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बैक डेट से नोटिफिकेशन जारी कर नियमों में बदलाव करने की कोशिश कर रही है, जो पूरी तरह गलत है।
उन्होंने यह भी कहा कि जिला उपायुक्तों को आरक्षण रोस्टर में 5 प्रतिशत तक बदलाव करने की अनुमति देना उचित नहीं है और इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर भी जोर-शोर से उठाया जाएगा।


