यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अब बच्चों के लिए देश का सबसे सुरक्षित प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है। महिला कल्याण विभाग की 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन सेवा ने राज्य में बाल सुरक्षा के ढांचे को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के साथ सुदृढ़ किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस हेल्पलाइन के माध्यम से अब तक 2.31 लाख से अधिक बच्चों को शोषण, बाल श्रम और लावारिस स्थितियों से बचाकर नया जीवन दिया गया है।
‘गोल्डन ऑवर’ रेस्क्यू: कॉल के 60 मिनट में मदद
महिला कल्याण विभाग की निदेशक डॉ. वंदना वर्मा के अनुसार, इस तंत्र को इतना संवेदनशील बनाया गया है कि कॉल प्राप्त होने के मात्र 60 मिनट के भीतर रेस्क्यू टीम मौके पर पहुँचकर बच्चे को सुरक्षित निकालती है।
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त्वरित सहायता: संकट में फंसे बच्चों को तत्काल पुलिस सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और कानूनी परामर्श उपलब्ध कराया जाता है।
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पुनर्वास: रेस्क्यू के बाद बाल कल्याण समिति के माध्यम से बच्चों को सुरक्षित आश्रय दिया जाता है और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
स्टेशनों और बस अड्डों पर ‘कड़ा पहरा’
बाल तस्करी (Human Trafficking) पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने हेल्पलाइन के दायरे को परिवहन केंद्रों तक बढ़ा दिया है।
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रेलवे यूनिट्स: प्रदेश के 28 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर विशेष चाइल्ड हेल्प डेस्क स्थापित हैं।
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बस स्टैंड यूनिट्स: 11 व्यस्त बस अड्डों पर यूनिट्स सक्रिय हैं ताकि घर से भटके या तस्करी कर लाए जा रहे बच्चों की पहचान कर उन्हें तुरंत बचाया जा सके।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की बड़ी कामयाबी
इस सेवा की प्रभावशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल चालू वित्तीय वर्ष (2025-26) में ही 77 हजार से अधिक बच्चों को समय पर सहायता पहुंचाई गई है। राज्य स्तर पर एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम के माध्यम से सभी 75 जनपदों की इकाइयों को रियल-टाइम मॉनिटर किया जा रहा है।


