स्मार्ट मीटर में खामियां मिलने पर उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ी, प्रीपेड मोड पर रोक की मांग

रिचार्ज के बाद भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बिजली न मिलने से उपभोक्ताओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रीपेड मोड पर रोक लगाने के साथ ही उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराए जाने की मांग की है।

स्मार्ट मीटर में खामियों को लेकर परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा बुधवार को विद्युत नियामक आयोग में लोकमहत्व का प्रस्ताव दाखिल कर संबंधित मीटर कंपनियों के भुगतान को रोकने की भी मांग करेगा। परिषद ने पूरे मामले में मुख्यमंत्री से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है।c

वर्मा का कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना के तहत स्थापित किए गए 10 क्लस्टर के एमडीएम (मीटर डाटा मैनेजमेंट) में तकनीकी खामियां है। अंडर कैपेसिटी की समस्या के चलते निगेटिव बैलेंस पर स्वतः कटे कनेक्शन रिचार्ज कराने के घंटों बाद भी नहीं जुड़ रहे है।

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रियल-टाइम डाटा प्रोसेसिंग प्रभावित होने से बैलेंज अपडेट होने में समय लग रहा है। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि एमडीएम की वास्तविक प्रोसेसिंग क्षमता और लोड हैंडलिंग का स्वतंत्र आडिट कराया जाए। जिन कंपनियों ने कम क्षमता का सिस्टम लगाया है, उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

 

उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देने के लिए जब तक सिस्टम पूरी तरह से ठीक न हो जाए तब तक स्मार्ट प्रीपेड मोड के विस्तार पर रोक लगाई जाए। निजी कंपनियों के माध्यम से प्रदेश में अब तक 70 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं।

इसके एवज में लगभग 400 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा लगभग 18,885 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई थी जबकि टेंडर 27,342 करोड़ रुपये की लागत पर आवंटित किए गए हैं।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लेकर पत्र

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि उपभोक्ताओं की जानकारी के बिना ही प्रीपेड मोड में मीटर परिवर्तित कर दिए जा रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से तब तक स्थगित किया जाए, जब तक व्यवस्था पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण नहीं हो जाती है।

साथ ही बिल भुगतान के बाद बिजली बहाल करने के लिए निर्धारित अवधि तय की जाए। उस दौरान बिजली बहाल न होने पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्घ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की मर्जी के बिना स्मार्ट प्रीपेड मीटर न लगाए जाएं।

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