शाप्रिक्स माल स्थित वेव सिनेमा का नजारा गुरुवार को कुछ अलग था। फिल्म देखने पहुंचे दर्शक आम लोग नहीं, बल्कि सुरक्षा संभालने वाले 464 से अधिक दारोगा थे। वे अपने-अपने वाहनों से सुबह साढ़े 11 बजे पहुंचे। वर्दी में सजे, अनुशासन के साथ सीटों पर बैठे और जब पर्दे पर धुरंधर-2 की कहानी शुरू हुई तो हर फ्रेम में उन्हें अपने ही जीवन की झलक दिखी।
एसएसपी अविनाश पांडेय ने की थी पहल
यह पहल एसएसपी अविनाश पांडेय ने की थी। उनके आदेश पर सब इंस्पेक्टरों को यह फिल्म दिखाई गई, ताकि ड्यूटी के रोजमर्रा के तनाव से उन्हें थोड़ी राहत मिले और जनता की सेवा का जोश ताजा हो। एएसपी अंतरिक्ष जैन भी इस मौके पर मौजूद रहे। फिल्म खत्म होते ही सभी अपनी-अपनी ड्यूटी पर रवाना हो गए, लेकिन उनके चेहरों पर एक अलग आत्मविश्वास झलक रहा था।
कई दारोगाओं ने कहा कि फिल्म देखकर लगा कि अपराध से निपटने के लिए साहस के साथ रणनीति जरूरी है। किसी ने कहा कि कहानी ने सिखाया कि अपराधी से एक कदम आगे की सोच रखनी चाहिए। किसी ने कहा कि मुझे जमाली का करेक्टर बहुत अच्छा लगा। धुरंधर-2 में दिखाई गई कई परिस्थितियां मेरठ पुलिस के प्रशिक्षण और वास्तविक अनुभवों से मेल खाती हैं।
अपराध की जांच, खुफिया सूचनाओं का आदान‑प्रदान, इन सभी पहलुओं ने जवानों को यह याद दिलाया कि उनका कार्य सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का प्रतीक है। एसएसपी अविनाश पांडेय ने कहा कि इस तरह की फिल्में हमारे जवानों में कर्तव्य भावना और व्यावसायिक समझ दोनों को मजबूत करती हैं। वे वास्तविक परिस्थितियों को और गहराई से समझ पाते हैं।
सब इंस्पेक्टरों ने दिया था सुझाव
एसएसपी अविनाश पांडेय बोले, सब इंस्पेक्टरों की कई दिनों से विवेचना और लंबित अपराध की समीक्षा की गई। 2023 बैच के दारोगा अभी पुलिसिंग में नए हैं। उनसे पुलिस के बारे में फीडबैक लिया गया। उन्होंने कहा कि संयुक्त प्लेटफार्म पर उनकी भी आपस में बातचीत होनी चाहिए। उनकी समस्याओं को भी सुना जाना चाहिए।
इन दिनों धुरंधर-2 फिल्म चल रही है। इसलिए उन्होंने यह प्रस्ताव रखा कि एक साथ फिल्म दिखाई जाए। फिल्म दिखाने के साथ सभी से पुलिस लाइन में पुलिसिंग को लेकर एक घंटे की बातचीत भी की गई। जिसमें आमजन से पुलिस के व्यवहार, अपराधों की रोकथाम और साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन पर चर्चा हुई। फीडबैक से हमेशा चीजें अच्छी होती हैं।


