मोरवा के होटल शंभवी में ग्राहकों से मनमानी वसूली? 20 रुपये की पानी बोतल 30 में बेचने का आरोप, टैक्स और राउंड ऑफ चार्ज भी अलग?

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सिंगरौली। जिले के मोरवा थाना क्षेत्र स्थित Hotel Shambhavi एक बार फिर ग्राहकों से कथित मनमानी वसूली को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि होटल में ग्राहकों को 1 लीटर मिनरल वाटर की बोतल निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत पर बेची जा रही है। इतना ही नहीं, पानी की बोतल पर अलग से SGST, CGST और “राउंड ऑफ” चार्ज जोड़कर अतिरिक्त रकम भी वसूली जा रही है।

स्थानीय लोगों और ग्राहकों का कहना है कि जिस पानी की बोतल पर स्पष्ट रूप से 20 रुपये MRP अंकित है, उसे होटल में 30 रुपये तक में बेचा जा रहा है। जबकि भारतीय कानून के अनुसार किसी भी पैकेज्ड उत्पाद को उसके निर्धारित MRP से अधिक कीमत पर बेचना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है।

MRP से ज्यादा वसूली पर क्या कहते हैं नियम?

भारत सरकार के लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 के अनुसार किसी भी पैक्ड वस्तु पर अंकित MRP से अधिक राशि वसूलना अवैध माना जाता है। MRP यानी “Maximum Retail Price” वह अधिकतम मूल्य होता है, जिससे ज्यादा कीमत उपभोक्ता से नहीं ली जा सकती।

विशेषज्ञों के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट या मॉल में भी पैकेज्ड मिनरल वाटर की बोतल यदि उसी सीलबंद रूप में बेची जा रही है, तो उस पर अंकित MRP से अधिक कीमत वसूलना नियमों के खिलाफ हो सकता है। कई मामलों में उपभोक्ता अदालतें और विभागीय जांच एजेंसियां ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई कर चुकी हैं।

टैक्स और “राउंड ऑफ” के नाम पर अतिरिक्त वसूली?

ग्राहकों का आरोप है कि होटल द्वारा पानी की बोतल की कीमत बढ़ाने के बाद उस पर अलग से SGST और CGST भी जोड़ा जा रहा है। वहीं बिल में “राउंड ऑफ” चार्ज के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूले जाने की भी शिकायत सामने आई है।

उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि किसी वस्तु का MRP टैक्स सहित अंकित है, तो उस पर दोबारा टैक्स जोड़ना गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में वाणिज्यिक कर विभाग और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग जांच कर सकते हैं।

लोकल ब्रांड बेचने पर भी उठे सवाल

मामले में यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि होटल में ग्राहकों को नामी ब्रांड की बजाय लोकल कंपनी का मिनरल वाटर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे ऊंचे दाम पर बेचकर अतिरिक्त मुनाफा कमाया जा रहा है। ग्राहकों का कहना है कि होटल प्रबंधन गुणवत्ता की बजाय मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है।

जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर उपभोक्ताओं से खुलेआम अधिक कीमत वसूलने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई कब होगी? क्या खाद्य विभाग, लीगल मेट्रोलॉजी विभाग और जिला प्रशासन इस मामले की जांच करेंगे या फिर ग्राहकों की जेब पर इसी तरह डाका पड़ता रहेगा?

उपभोक्ताओं ने की जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो होटल प्रबंधन पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी प्रतिष्ठान ग्राहकों के साथ इस तरह की मनमानी न कर सके।

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