घात लगा कर बैठे थे हमलावर, पहले चाचा कह कर पुकारा…फिर मारी गोली

2.0kViews
1097 Shares

 प्रीतिभोज में हिस्ट्रीशीटर संजय सिंह पर हमला करने वाले विपिन दुबे एवं उसके भाई अभय ने नियोजित ढंग से वारदात को अंजाम दिया। विपिन एवं अभय कई दिनों से अपने पिता के हत्यारोपी संजय सिंह के करीब आने का प्रयास कर रहे थे। वारदात के दिन अपने सरकारी गनर को गुमराह करके दोनों घर से निकले और घात लगा कर बैठ गए।

कार्यक्रम स्थल से निकल कर संजय ने जैसे ही अपनी स्कार्पियो में बैठने का प्रयास किया वैसे ही दोनों पहुंचे और पहले उन्हें चाचा कह कर पुकारा फिर गोली मार दी। गनीमत रही कि गोली संजय के कंधे में लगी। यह बात घायल संजय सिंह ने अपने उन करीबियों को बताई, जो केजीएमयू लखनऊ में उनका हाल जानने पहुंचे थे।

संजय और विपिन के परिवार में रंजिश 18 वर्ष पहले शुरू हुई थी। वर्ष 2008 में बच्चों के विवाद ने बचपन के दो मित्रों संजय सिंह गुल्लू और उमाशंकर दुबे उर्फ पंडा के बीच दुश्मनी पैदा कर दी। 15 मार्च वर्ष 2008 को ईंटगांव निवासी अजीत सिंह के यहां आयोजित प्रीतिभोज में पूर्व जिला पंचायत सदस्य संजय सिंह गुल्लू के समर्थकों और उनके मित्र उमाशंकर दुबे के पुत्र विपिन दुबे के बीच विवाद हुआ था। घर आकर विपिन ने यह बात अपने पिता उमाशंकर दुबे को बताई।

उमाशंकर दुबे ने फोन पर गुल्लू सिंह के इस कृत्य का विरोध किया था। जानकारी मिलने पर गुल्लू मिल्कीपुर स्थित उमाशंकर दुबे के आवास पर पहुंचा, जहां गुल्लू सिंह के समर्थकों और उमाशंकर के परिवारीजनों के बीच विवाद हो गया। दोनों पक्षों से लाठी डंडा, ईंट पत्थर चलने लगे।

इसमें गुल्लू गंभीर रूप से घायल हो गया और लखनऊ के निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। गुल्लू की हत्या में उमाशंकर दुबे, उनके पिता,भाई व नाबालिग बेटे के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। संजय सिंह और गुल्लू में गहरी दोस्ती थी। गुल्लू की हत्या का प्रतिशोध संजय सिंह ने 26 जून 2009 को उमाशंकर दुबे की हत्या करके लिया। इस हमले में उमाशंकर के सरकारी गनर महेंद्र यादव की भी मौत हो गई थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *