बेटियों को कर चुके विदा… सामूहिक विवाह योजना का लाभ पाने को फिर करवाना चाहते फेरे, आवेदनों की जांच में पर्दाफाश

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श्रमिक अमरनाथ कुरील ने उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कन्या विवाह सहायता योजना के तहत 14 मई को आयोजित सामूहिक विवाह में बेटी महिमा की शादी के लिए आवेदन किया। आवेदन की जांच की गई तो पता चला कि महिमा की शादी तो 18 अप्रैल को हो चुकी है।

इसी तरह, श्रमिक जयपाल ने बेटी गोल्डी के सामूहिक विवाह के लिए आवेदन किया था। जांच में पता चला कि गोल्डी का विवाह 13 मार्च को हो चुका है। ये दो मामले तो बानगी भर हैं। सामूहिक विवाह के लिए आवेदन करने वाले ऐसे ही 76 श्रमिक अपात्र पाए गए हैं।

श्रम विभाग सामूहिक विवाह में बेटी की शादी पर 85 हजार रुपये की आर्थिक मदद देता है। 15 हजार रुपये कपड़ों व शादी के आयोजन पर खर्च करता है। पहले सामूहिक विवाह पर 65 हजार रुपये, 15 हजार रुपये कपड़ों व शादी पर खर्च होता था। श्रम विभाग का सामूहिक विवाह समारोह 14 मई को आईटीआई ग्राउंड में होगा।

इसमें मंडल भर के 101 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया जाएगा। सामूहिक विवाह समारोह 14 मई को पांडु नगर स्थित आईआईटी ग्राउंड में होगा। इसमें मुख्य अतिथि श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर होंगे। राज्यमंत्री मनोहर लाल को भी आमंत्रित किया गया है।

कानपुर मंडल के छह जिलों कानपुर, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया, इटावा के श्रमिकों की बेटियों की शादी होगी। सामूहिक विवाह के लिए 177 आवेदन आए थे। श्रम निरीक्षकों से इन आवेदनों की जांच कराई तो 76 अपात्र पाए गए। अपात्रों में ज्यादातर श्रमिकों की बेटियों की शादी पहले ही होना पाया गया।

सहायक श्रमायुक्त राम लखन पटेल ने बताया कि श्रमिकों को किसी योजना का लाभ देने से पहले आवेदनों की जांच कराई जाती है। जांच में अपात्र पाए गए श्रमिकों के नाम हटा दिए जाते हैं। सामूहिक विवाह की सूची से भी अपात्रों के नाम हटा दिए गए हैं।

उधर, कन्या सहायता योजना में जनवरी 2024 में 10.78 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ था। विभागीय अधिकारी की आईडी से वेब पोर्टल पर लागइन कर 201 अपात्रों को 10.78 करोड़ का भुगतान कर दिया गया था। इसकी भी जांच चल रही है।

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