भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) ने स्वदेशी दुधारू पशु प्रजनन के क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की। वैज्ञानिकों ने आइवीएफ तकनीक विकसित की। इसके माध्यम से साहीवाल गायों ने पांच बछड़ों को जन्म दिया।
गुरुवार को वैज्ञानिकों ने बताया कि अल्ट्रासाउंड-मार्गदर्शित ट्रांसवेजाइनल ओसाइट एस्पिरेशन, इन-विट्रो भ्रूण उत्पादन और भ्रूण स्थानांतरण तकनीक (ओपीयू-आइवीएफ-ईटी) के माध्यम से पहली बार ऐसी सफलता मिली है।
संस्थान के पशु प्रजनन विभाग के डा. बृजेश कुमार के बताया कि पहला बछड़ा 28 फरवरी को हुआ। इसके बाद अगले चार दिनों में चार अन्य का जन्म हुआ। इन बछड़ों का उत्पादन उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले जर्मप्लाज्म से किया गया है। प्रयोगशाला में पांच अलग गायों को रखा गया था। इन सभी में अलग-अलग दिन भूण प्रत्यारोपित किया गया।
संस्थान ने वर्ष 2018 में एंब्रियो ट्रांसफर तकनीक के माध्यम से स्वदेशी गोवंश प्रजनन कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके तहत इन-विवो तकनीकों, विशेषकर मल्टीपल ओव्यूलेशन और एंब्रियो ट्रांसफर के जरिए लगभग 30 बछड़े पैदा कराए गए।
हालांकि, उच्च हार्मोनल लागत एवं संचालन संबंधी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने वर्ष 2022-23 में ओपीयू-आइवीएफ तकनीक को अपनाया, जो अधिक प्रभावी और व्यावहारिक सिद्ध हुई। इन बछड़ों को जन्म देने वाली साहीवाल गाय प्रतिदिन 12 लीटर से अधिक दूध देती थी।


