बुधवार को जिला परिषद की राजनीति ने एक अनोखा दृश्य पेश किया। उपाध्यक्ष प्रणव कुमार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सुबह 11.30 बजे बैठक शुरू हुई, लेकिन दोपहर 1.10 बजे तक सदन में सन्नाटा पसरा रहा। जिप अध्यक्ष विपिन कुमार मंडल और डीडीसी प्रदीप कुमार सिंह सदस्यों का इंतजार करते रहे, लेकिन प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले 14 सदस्य भी उपस्थित नहीं हुए। निर्धारित समय सीमा बीतते ही अध्यक्ष ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इस प्रकार उपाध्यक्ष की कुर्सी सुरक्षित रही।
अविश्वास प्रस्ताव कैसे ढह गया
दिसंबर में 14 सदस्यों ने उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था। 31 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए दो-तिहाई यानी लगभग 20 सदस्यों की आवश्यकता थी। पर्याप्त संख्या न जुट पाने के कारण विरोधी पार्षद बैठक में शामिल नहीं हुए। यही वजह रही कि प्रस्ताव खुद ही ढह गया। बैठक समाप्त होने के लगभग एक घंटे बाद दर्जनभर सदस्य बधाई देने पहुंचे, जिनमें कुछ वे सदस्य भी शामिल थे जिन्होंने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया था।
उपाध्यक्ष की रणनीति और विश्वास जीत
उपाध्यक्ष प्रणव कुमार ने बताया, “पिछले दो दिनों से सभी सदस्यों के बीच समन्वय बनाया। उन्होंने कहा कि आगामी पंचायत चुनाव के बहुत कम माह शेष हैं और अविश्वास से विकास कार्य अवरुद्ध हो सकते थे। इसलिए सभी से सहयोग की अपील की। इसके कारण अविश्वास को विश्वास में बदलने में सफलता मिली। कई सदस्य ने मोबाइल से तो कई कार्यालय में आकर बधाई दी। अब मैं गांव के दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना करने जा रहा हूँ।”
नेताओं की विस्तृत प्रतिक्रिया
जिप अध्यक्ष विपिन कुमार मंडल: “अविश्वास प्रस्ताव लाकर मजाक बना दिया गया। कुछ माह ही पंचायत चुनाव बचे हैं। हमने देखा कि विकास कार्य में अवरोध नहीं होना चाहिए। इस दौरान हमारी कोशिश रही कि सभी सदस्य एकजुट होकर काम कर सकें। प्रस्ताव पर बहुमत नहीं होने के कारण कार्रवाई स्वतः समाप्त हो गई। यह साबित करता है कि हमारी रणनीति और नेटवर्क मजबूत है।”
पूर्व जिप अध्यक्ष अनंत कुमार उर्फ टुनटुन साह: “हमने भी अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया था, लेकिन स्पष्ट था कि अभी कार्य करने का समय प्राथमिकता है। पिछले एक वर्ष में जितना कार्य चार साल में नहीं हुआ, उतना हुआ। हालांकि, राजनीतिक दृष्टिकोण से हम अपने प्रयास जारी रखेंगे। इस घटना से यह स्पष्ट हो गया कि सहयोग और समन्वय कितना महत्वपूर्ण है।”
अन्य सदस्य: कई सदस्यों ने बताया कि उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर तो किया था, लेकिन विकास कार्य और पंचायत चुनाव के समय को ध्यान में रखते हुए बैठक में शामिल नहीं हुए। कुछ ने कहा कि उपाध्यक्ष और अध्यक्ष ने व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर स्थिति को संभाला।


