केंद्र सरकार ने सरकारी क्षेत्र की दोनों प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियों ओएनजीसी और ओआईएल के पारंपरिक गैस फील्डों से निकाली गई गैस की कीमत 1 अप्रैल, 2026 से बढ़ा कर सात डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (ब्रिटिश थर्मल यूनिट- प्राकृतिक गैस मापने की अंतरराष्ट्रीय इकाई) कर दी है।
घरेलू फील्डों से निकाली गई गैस की कीमत तय करने की अधिशासित व्यवस्था है जिसके तहत पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से फैसला किया जाता है। अभी तक यह कीमत 6.75 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू थी। वैसे कीमत वृद्धि का यह फैसला पश्चिम एशिया के मौजूदा विवाद से संबंधित नहीं है।
वर्ष 2023 से सरकार ने घरेलू फील्डों के गैस की कीमत तय करने का नया फॉर्मूला तय किया है, जिसके तहत ओएनजीसी व ओआईौएल को घरेलू फील्डों से उत्पादित गैस के लिए 20 फीसद तक प्रीमियम देने का प्रावधान है। वैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले एक महीने के दौरान प्राकृतिक गैस की कीमत बढ़ कर 20-25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच गया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत पेट्रोलियम प्लानिंग व एनालाइसिस सेल (पीपीएसी) की तरफ से जारी अधिसूचना में इस बारे में सूचना दी गई है। यह कीमत सिर्फ सरकार की तरफ से नामिक कुछ गैस ब्लॉकों पर लागू होती है। हालांकि देश के कुल घरेलू उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी 60 फीसद है।
देश में रोजाना 9.2 करोड़ घन मीटर गैस का उत्पादन होती है। इनकी आपूर्ति उर्वरक प्लांट, बिजली, सीएनजी, पीएनजी आदि को की जाती है। जाहिर है कि उत्पादन कीमत बढ़ने से इन क्षेत्रों में भी गैस महंगी होगी। यानी उपभोक्ताओं को सीएनजी और घरेलू रसोई गैस महंगी पड़ सकती है। 2023-24 और 2024-25 के लिए उक्त कीमत 6.50 डॉलर थी। अप्रैल 2025 से इसे 6.75 डॉलर किया गया।


