कौड़ियाला, गेरुआ और सरयू नदी के बीच फंसे एक गांव भरथापुर के लोगों की जिंदगी बदलने की नींव बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों पड़ी। भरथापुर के लोग अब मूल जगह से 70 किलोमीटर दूर नई बसावट में बसेंगे। बसने-बसाने की पृष्ठभूमि में 29 अक्टूबर 2025 की वह दुखद घटना है, जिसमें भरथापुर के नौ लोगों की जल-समाधि हो गई थी।
डूबने वाले तीन लोगों के शव भी नहीं मिले थे। हादसा तब हुआ था जब लखीमपुर जिले के खैरटिया में लगने वाले बाजार से सामान लेकर टापूनुमा इस गांव के लोग नाव से लौट रहे थे। सरयू की लहरें अचानक उग्र हुईं और नाव पलट गई। इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने क्षेत्र का दौरा किया था और तभी नई बसावट की आश्वस्ति दी थी।
अब मिहींपुरवा के सेमरहना में नई कालोनी बनेगी। यहां 136 परिवारों (लगभग 500 लोग) को बसाया जा रहा है। कालोनी में पक्के मकान, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र, अन्नपूर्णा भवन, स्वास्थ्य केंद्र, बिजली, पानी की सुदृढ़ व्यवस्था होगी। मुख्यमंत्री ने डिजिटल माध्यम से 136 परिवारों के खातों में 1.63 करोड़ की पहली किस्त बुधवार को जारी की।
भरथापुर, बहराइच जनपद का वह सीमांत क्षेत्र है, जहां भारत की सीमा खत्म होती है। कागजों पर यह एक “वन ग्राम” था, लेकिन यहां जीवन यापन बहुत कठिन था। भरथापुर के मुन्नालाल व उनके जैसे सैकड़ों ग्रामीणों के लिए नदी केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि दुनिया से कटे होने का संत्रास थी।
गांव तीन तरफ से नदियों से घिरा था और चौथी तरफ कतर्निया का घनघोर जंगल। अगर किसी बच्चे को बुखार आ जाए या किसी गर्भवती को अस्पताल ले जाना हो तो उन्हें 70 किलोमीटर का लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय करना पड़ता था।
सरयू व सहायक धाराओं में घड़ियालों और मगरमच्छों का बसेरा था। नाव जरा सी डगमगाई नहीं कि जिंदगी काल के गाल में समा जाती। मुख्यमंत्री ने जब खुद स्वीकार किया कि “मैं अंदर से कांप गया”, तो यह उस भयावहता का प्रमाण था, जिसे ग्रामीण दशकों से झेल रहे थे। मुख्यमंत्री की पहल पर अब 136 परिवारों के जीवन की रेखा बदल रही है। करीब 22 करोड़ की लागत से नई बसावट में ये परिवार बसेंगे।
बुधवार को मुख्यमंत्री ने जब मंच पर 10 महिलाओं को भूमि आवंटन और आवास का चेक सौंपा, तो वह केवल आर्थिक मदद नहीं थी, जीवन सुरक्षा का “कवच” था। अब ये परिवार वन ग्राम के “अस्थायी” निवासी नहीं, बल्कि पक्के आवास और अपनी जमीन के मालिक होंगे।
मुख्यमंत्री योगी ने नए गांव का नाम भरतपुर रखा
मुख्यमंत्री ने बुधवार को इस नई कालोनी का नाम “भरतपुर” घोषित किया। उन्होंने त्रेतायुग के उस प्रसंग को याद किया, जब प्रभु श्रीराम लंका विजय के बाद भरत से मिलने आए थे। उन्होंने चाहा कि सेमरहना (जहां विस्थापन हो रहा है) के पुराने निवासी और भरथापुर के नए आने वाले लोग आपस में वैसे ही प्रेम से रहें, जैसे राम और भरत रहे थे।
अब भरथापुर के लोगों की आंखों में वह डर नहीं रहेगा कि कि रात को नदी का पानी उनके बिस्तरों तक आ जाएगा या मगरमच्छों के साये में नाव चलेगी। अब उनके पास शौचालय होगा, विद्यालय करीब होगा और सबसे बढ़कर जीवन सुरक्षित होगा। भरथापुर का भूगोल सरयू की लहरों में बह जाएगा, लेकिन भरतपुर का भविष्य अब सेमरहना की सुरक्षित मिट्टी में अपनी जड़ें जमा रहा है।


