जम्मू-कश्मीर में कैंसर नियंत्रण ढांचा लागू करने पर सहमति, भारत मंडपम में उच्चस्तरीय बैठक

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जम्मू-कश्मीर में बढ़ते कैंसर बोझ, अनुसंधान और उपचार को लेकर नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के लिए चरणबद्ध, अनुसंधान-आधारित और व्यवहारिक कैंसर नियंत्रण ढांचा अपनाने पर सहमति बनी। यह ढांचा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और देश के प्रमुख राष्ट्रीय कैंसर संस्थानों के तकनीकी सहयोग से लागू किया जाएगा।

बैठक में नीति आयोग, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, आईसीएमआर, जम्मू-कश्मीर सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, देश के प्रमुख चिकित्सक, शोधकर्ता और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने मिलकर इस बात पर जोर दिया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए एक समन्वित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

बैठक में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी.के. पाल, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल दुल्लू, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल, जम्मू-कश्मीर सरकार के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ. सैयद आबिद रशीद शाह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके पीछे जीवनशैली, पर्यावरणीय कारक और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच जैसी चुनौतियां जिम्मेदार हैं। इसीलिए एक चरणबद्ध कैंसर नियंत्रण ढांचा तैयार किया जा रहा है, जिसमें रोकथाम, शुरुआती पहचान, उपचार और अनुसंधान को प्राथमिकता दी जाएगी।

आईसीएमआर और राष्ट्रीय कैंसर संस्थानों के सहयोग से इस ढांचे को लागू करने की योजना है। इसमें कैंसर रजिस्ट्री को मजबूत करना, आधुनिक उपचार सुविधाओं का विस्तार करना और ग्रामीण व दूरदराज क्षेत्रों में कैंसर जांच शिविर आयोजित करना शामिल होगा।

बैठक में यह भी तय किया गया कि कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाला जाएगा। जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य विभाग और केंद्र सरकार मिलकर इस दिशा में काम करेंगे ताकि कैंसर मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।

विशेषज्ञों ने कहा कि कैंसर से लड़ाई केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जनजागरूकता, जीवनशैली में बदलाव और अनुसंधान को भी समान महत्व देना होगा। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि कैंसर नियंत्रण ढांचे को लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

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