जम्मू में रसोई गैस की किल्लत से निपटने के लिए रामलीला क्लब ने एक अनोखा तरीका निकाला है। इस संस्था ने जम्मू में राम रसोई की शुरुआत की है, जहां पर न केवल दिन में महिलाएं आकर पारंपरिक चूल्हे पर खाना बना रही हैं बल्कि यहां पर अतिरिक्त चूल्हे और लकड़ी भी रखी है ताकि आवशकता पड़ने पर कोई भी जरूरतमंद यहां अपनी रोटी बना सके।
यहां खाना बनाने आ रही महिलाओं का दावा है जिस तरह से युद्ध जारी है और रसोई गैस की किल्लत शुरू हो गई है, ऐसे में गैस बढ़ाने की आवश्यकता शुरू हो गई है। यहां आस-पास की महिलाएं जाकर लकड़ी पर खाना बना रही हैं जिससे गैस की बचत हो रही है। गैस की बचत के साथ-साथ यहां पर सारी महिलाएं आकर आपस में दुख-सुख भी भांट लेती हैं।
विरासत को बहाल करने की कोशिश
इन महिलाओं का दावा है कि यह कोई नया तरीका नहीं है बल्कि पारंपरिक रूप से भी यह सामूहिक चूल्हे गांव में जलाए जाते थें। यह राम रसोई दरअसल सामूहिक रसोईघर है जहां पर एक ही चूल्हे पर कई परिवार खाना बनाते हैं, जिससे एलपीजी की बचत हो जाती है।
प्रवासी श्रमिकों के लिए भी सुविधा
सामाजिक कार्यकर्ता राकेश चौधरी ने कहा कि हमारा लक्ष्य सभी को आपस में जोड़ना है। इसके अलावा यहां कई प्रवासी श्रमिक भी रहते हैं जो बीते कुछ दिनों से इस बात की परेशानी झेल रहे हैं कि उन्हें समय पर एलपीजी नहीं मिल रही है। ऐसे में हमने यह प्रयास किया है और आज हमने गांव की कुछ औरतों को यहां जमा किया है।
हमने सभी नागरिकों से जिसमें प्रवासी श्रमिक भी हैं, के लिए यह सुविधा यहां शुरू की है। वह दिन या फिर शाम में किसी भी वक्त आकर यहां चूल्हा और तंदूर जलाकर अपना भोजन पका सकते हैं। किसी पर कोई रोक नहीं होगी।


