वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों और अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ईंधन व गैस की कमी को लेकर कड़े उपाय किए जा रहे हैं। इस बीच तेल कंपनियों ने बुधवार को पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि भारत के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है।
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों ने एक ऐसे युद्ध को जन्म दिया है, जिसने न केवल खाड़ी क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। इसके चलते प्रमुख जलमार्ग हॉर्मुज स्ट्रेट लगभग पूरी तरह से बंद हो गया है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद होर्मुज में ईंधन वाले जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है।
वैश्विक संकट के बीच उठने लगा सवाल
हॉर्मुज स्ट्रेट पर पैदा हुए अवरोध के कारण गैस और कच्चे तेल से भरे टैंकरों के फंसने या उनमें देरी होने लगी है। इस बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी? हालांकि, कुछ लोगों ने तो यहां तक आशंका जताई है कि कहीं लॉकडाउन जैसे उपाय ही न अपनाने पड़ जाएं।
अफवाहें बेबुनियाद’
बढ़ती अटकलों और आशंकाओं को दूर करते हुए भारतीय तेल कंपनियों भारत पेट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्प लिमिटेड ने बुधवार को कहा कि ये अफवाहें बेबुनियाद हैं।
भारत पेट्रोलियम ने क्या कहा?
BPCL ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कमी की अफवाहें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। भारत के पास ईंधन का पर्याप्त भंडार है और आपूर्ति श्रृंखलाएं सामान्य रूप से चल रही हैं। BPCL ने कहा कि वह पूरी तरह से चालू है और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है।
हिंदुस्तान पेट्रेलियम ने क्या कहा?
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने भी अपने बयान में इसी तरह की बात कही और ग्राहकों को भरोसा दिलाया कि पूरे देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है।
HPCL ने कहा, “प्रिय ग्राहकों पूरे देश में पेट्रोल, डीज़ल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। ईंधन की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों से गुमराह न हों और घबराकर खरीदारी न करें। कृपया अपनी सामान्य खपत जारी रखें। HPCL अपने पूरे नेटवर्क में बिना किसी रुकावट के और सुचारू रूप से ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए हालिया भाषण में उन्होंने जारी युद्ध के कारण पड़ने वाले बुरे प्रभावों की प्रबल संभावना जताई थी। तेल-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में चल रही लड़ाई के चलते वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा को भी उन्होंने “गंभीर परिणामों” वाला बताया था।


