राज्य में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर पटना हाई कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। अदालत ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को इस मुद्दे पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 20 अप्रैल निर्धारित की है।
मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायाधीश हरीश कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत समीक्षा की। विदित हो कि राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेकर हाई कोर्ट सुनवाई कर रही है।
न्यायालय ने अगली सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सचिव, बिहार मानसिक स्वास्थ्य एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के निदेशक, पुलिस महानिदेशक तथा कारागार महानिरीक्षक को वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कारागार महानिरीक्षक को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल (मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के अधिकार) नियम, 2018 के नियम 10 और 11 के अनुपालन की प्रक्रिया का सत्यापन कर विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि एक अक्टूबर, 2025 से प्रति मरीज 182.325 रुपये प्रतिदिन की दर से निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
साथ ही, वर्ष 2022 के संकल्प के तहत मरीजों को 144 प्रकार की दवाओं की निःशुल्क आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। अदालत ने पुलिस महकमे को निर्देश दिया कि प्रदेश के सभी प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर व्यापक रूप से जारी और प्रचारित किए जाएं।
न्यायालय ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रथमदृष्टया मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत होने वाले व्यक्ति को सड़कों पर भटकते हुए देखे, तो वह टोल-फ्री नंबर पर सूचना दे सके। यह हेल्पलाइन 24×7 आपातकालीन सहायता के लिए उपलब्ध रहेगी।
एसएसपी-एसपी को निर्देश
कमजोर वर्ग के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी), सीआइडी द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि पुलिस महानिदेशक ने सभी जिला एसएसपी/एसपी को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 की धारा 100 के प्रावधानों का संवेदनशीलता के साथ अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, साथ ही की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया है।
राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2022 से अब तक 36,381 लोगों को टेली-मानस सेवा के जरिए परामर्श प्रदान किया गया है। वहीं, बीते वर्षों में कई मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों की पहचान कर सफल उपचार के बाद उन्हें उनके घरों तक पहुंचाया गया है।
बढ़ेगी बेड की संख्या
स्वास्थ्य ढांचे की बात करें तो वर्तमान में पुरुषों के लिए 100, महिलाओं के लिए 60 तथा कैदियों के लिए 20 बेड की व्यवस्था है, जिसे निकट भविष्य में बढ़ाने की योजना है। जिला अस्पतालों के ओपीडी आंकड़े भी मानसिक स्वास्थ्य मामलों में निरंतर वृद्धि का संकेत दे रहे हैं।
वर्ष 2022-23 में 14,503 नए मरीज सामने आए, जो 2024-25 में बढ़कर 20,677 हो गए। इसी अवधि में फालो-अप मरीजों की संख्या भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।


