फर्जी रजिस्ट्री मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक और आरोपित को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपित इंसान दिल्ली के मयूर विहार का रहने वाला है। आरोपित इंसान इस मामले में गवाह के रूप में पेश हुआ था।
वह असली प्रवीण की जगह फर्जी गवाह बनकर खड़ा हुआ था और आरोपितों ने उसे फर्जी दस्तावेजों में इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि आरोपित मजदूरी करता है और उसे गवाह बनने के लिए दो हजार रुपये दिए गए थे।
फर्जी स्टांप बनाने की मशीन बरामद
वहीं पुलिस ने मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपित विनय के कब्जे से फर्जी स्टांप बनाने की मशीन भी बरामद की है, जिससे दस्तावेजों पर लगाने के लिए फर्जी स्टाम्प बनाई गई थी। पुलिस ने दोनों आरोपितों को शनिवार को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है।
वहीं, मामले में अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस के अनुसार जल्द ही बाकी आरोपितों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
दिल्ली के शालीमार बाग के बी ब्लाक के मकान नंबर 127, दूसरी मंजिल के रहने वाले विकास पाड़िया ने 12 जनवरी को गन्नौर के एसीपी को दी शिकायत में बताया कि उनकी फर्म सपाज एस्टेट प्रा. लि. की गन्नौर के बाय रोड पर वर्ष 2011 से दो रजिस्ट्रियों में 36 कनाल जमीन जमीन है।
10 जनवरी को उन्हें पता चला कि उनकी जमीन की फर्जी कागजों के आधार पर रजिस्ट्री हो गई है।
फर्जी अथॉरिटी लेटर बनाकर बेची जमीन
जांच में उन्हें पता चला कि नसीरपुर बांगर के प्रमोद कुमार ने उनकी फर्म का फर्जी अथारिटी लेटर बनवाकर खुद को जमीन का मालिक बताकर जींद के पिल्लूखेड़ा के बलबीर सिंह को करीब 6.16 करोड़ रुपये में बेच दिया।
27 नवंबर को जमीन की रजिस्ट्री के दौरान गोहाना के गांव बरोदा के प्रवीन कुमार को गवाह और गांव बाय के रविंद्र को नंबरदार दिखाया गया है।


