राज्य में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 55 हजार सौर संयंत्र लगाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले वित्तीय वर्ष में सिर्फ 26,383 संयंत्र स्थापित हुए हैं।
कुरुक्षेत्र 106 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर चुका है और अंबाला भी करीब 84 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर दूसरे नंबर पर है। इसके बावजूद लक्ष्य अभी दूर है। आंकड़े बताते हैं कि योजना ने रफ्तार तो पकड़ी, लेकिन यह पूरे प्रदेश में एकसमान नहीं है।
17 मार्च तक 47.96 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल हो सका है जोकि 31 मार्च तक 100 प्रतिशत करना है। कुछ जिलों में यह योजना जमीन पर उतर चुकी है, तो कुछ जगह अब भी कागजों से आगे बढ़ने में संघर्ष कर रही है।
जानिये, जिलों की स्थिति
कुरुक्षेत्र ने लक्ष्य से ज्यादा 106.49 उपलब्धि दर्ज हुई। अंबाला इसके साथ दूसरे नंबर पर है जहां 83.54, कैथल (73.56%) और यमुनानगर (70.42%) भी मजबूत स्थिति में हैं और लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इन्हीं जिलों में लोगों की भागीदारी और प्रशासनिक सक्रियता नजर आ रही है।
इसके विपरीत, रोहतक (53.50%), करनाल (52.37%) और पंचकूला (51.21%) जैसे जिले बीच के मोर्चे पर खड़े हैं न बहुत आगे, न बहुत पीछे। यहां रफ्तार है, लेकिन वह निर्णायक नहीं बन पाई है। लिहाजा कहीं छतों पर सौर संयंत्र लग चुके हैं, तो कहीं छत तैयार होने के बावजूद लोग फाइलों और मंजूरी के इंतजार में हैं।
जानिये, लक्ष्य क्यों नहीं हो पा रहा पूरा
आवेदन के बाद कई लोगों को स्वीकृति के लिए हफ्तों नहीं, महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। अधिकृत एजेंसियां कम हैं, संपर्क करने का प्रयास होता है तो प्रतिनिधि फोन तक नहीं उठाते। सब्सिडी को लेकर भी भ्रम है।
कितनी मिलेगी, कब मिलेगी, यह स्पष्ट जानकारी नहीं है। अधिकारी समय पर साइट विजिट नहीं करते। छोटी-छोटी त्रुटियों में फाइलें वापस कर दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब है।
यहां चिंताजनक स्थिति
सबसे ज्यादा चिंता झज्जर (41.97%), पानीपत (39.24%) और खासकर सोनीपत (28.03%) को लेकर है। सोनीपत में लक्ष्य और उपलब्धि के बीच का अंतर सबसे ज्यादा है, जो इस बात का संकेत है कि वहां योजना की गति बेहद धीमी है।


