फरवरी में सीमांचल के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा बॉर्डर के समीप से अतिक्रमण हटाने व घुसपैठियों की पहचान करने के दिए गए निर्देशों पर असर शुरू हो गया है।
जिला प्रशासन ने भारत-नेपाल बॉर्डर से सटे नो मेंस लैंड पर अतक्रमित जमीन को चिह्नित कर वहां से अतिक्रमण खाली करा दिया है। घुसपैठियों की पहचान के लिए साझा रणनीति तैयार की जा रही है। हर स्तर पर सर्वे करने के दिशा में पहल हो रही है।
केंद्रीय गृहमंत्री ने किशनगंज में की थी बैठक:
केंद्रीय गृहमंत्री ने किशनगंज में आइबी, बीएसएफ, सेना के प्रमुख अधिकारी, बिहार के गृहमंत्री व अधिकारियों के साथ बैठक की थी। नेपाल बॉर्डर पर अतिक्रमण की समीक्षा करते हुए त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया था। घुसपैठियों की पहचान कर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया था।
खुफिया सूत्रों की मानें तो सीमांचल में घुसपैठ को लेकर तैयार की गई रिपोर्ट से भी केंद्रीय गृहमंत्री को अवगत कराया गया था। इसमें किस तरह घुसपैठ हो रही है और उसे किस माध्यम से शरण दी जा रही है, इसका विस्तृत उल्लेख किया गया था।
इसके अलावा कुछ संदिग्ध दलालों की पहचान कर फर्जी कागजात बनाने समेत अन्य नेटवर्क की भी जानकारी दी गई थी।
छह स्थानों पर किया गया अतिक्रमण:
नेपाल सीमा से सटे बॉर्डर इलाकों की स्थलीय जांच प्रशासनिक अधिकारियों व एसएसबी के अधिकारियों ने की थी। जांच के क्रम में नेपाल बॉर्डर से सटे छह स्थानों पर नो मेंस लैंड क्षेत्र में अतिक्रमण पाया गया। इन जगहों पर कुल 20 परिवार अपना घर बनाकर रह रहे थे।
कुछ स्थानों पर खेती व चाय बगान रहने की बात भी सामने आई। इसमें कुछ लोगों द्वारा पक्का निर्माण भी कर लिया गया था। यहां से 20 घरों को हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। खेत व चाय बगान को भी हटवाया गया। घुसपैठियों की पहचान के लिए अन्य जिलों के साथ साझा रणनीति बनाने की दिशा में पहल हो रही है।
उल्लेखनीय है कि किशनगंज सीमांचल का वह जिला है, जहां नेपाल की सीमा सटती है और बांग्लादेश की सीमा भी महज कुछ किलोमीटर पर है। जिले से करीब 80 किलोमीटर नेपाल की सीमा सटती है।
इस खुली सीमा पर एसएसबी की तैनाती की गई है। 36 बॉर्डर आउट पोस्ट बने हुए हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह इलाका अति संवेदनशील माना जाता है।


