UP में फर्जी डिग्री कांड: जामिया उर्दू अलीगढ़ और ग्लोकल यूनिवर्सिटी ने 11 डिग्रियां बताईं फर्जी, 9 में जांच बाकी
एसआइटी (विशेष जांच दल) शुक्रवार को एसआइटी जामिया उर्दू अलीगढ़ की हाईस्कूल की मार्कशीट व ग्लोकल विश्वविद्यालय सहारनपुर में 11 डिग्रियां-मार्कशीट लेकर पहुंची थी, लेकिन वहां के प्रबंधन ने उन मार्कशीट-डिग्रियों को फर्जी बता दिया। उन्होंने कहा कि उनके यहां ये डिग्रियां आनलाइन नहीं दिख रही है। न ही उस नाम के किसी छात्र का कभी प्रवेश हुआ था।
एसआइटी पिछले तीन दिनों में 126 मार्कशीट-डिग्रियां का सत्यापन करा चुकी है, लेकिन सभी फर्जी निकली। अन्य विश्वविद्यालयों में भी जांच कर रही है। वहीं, एडीसीपी दक्षिण योगेश कुमार ने बताया कि फरीदबाद के लिंग्या विश्वविद्यालय ने एसआइटी को जानकारी दी कि वर्ष 2023 में उनके विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइट बनाकर एक व्यक्ति ने किसी से मिलते-जुलते नाम से फर्जी डिग्री बना दी थी। जानकारी मिलने पर उनके यहां से संबंधित थाने में मुकदमा भी कराया थ। इसके बाद अब फर्जी वेबसाइट को लेेकर जांच कर रही है।
किदवई नगर थाना पुलिस ने फर्जी डिग्री-मार्कशीट बनाने वाले एक गिरोह के सरगना रायबरेली के शैलेंद्र कुमार, कौशांबी निवासी नागेंद्र मणि त्रिपाठी, गाजियाबाद के जाेगेंद्र व शुक्लागंज के अश्वनी कुमार को 19 फरवरी को जेल भेजा था, जबकि पांच आरोपित शुभम दुबे, शेखू, छतरपुर निवासी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद का मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद निवासी विनीत फरार हैं।
आरोपितों के पास से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश समेत 14 राज्यों के नामी विश्वविद्यालय के 1000 से ज्यादा डिग्री और मार्कशीट बरामद की थी। इन मार्कशीट-डिग्रियां व पूरे गिरोह की जांच के लिए एसआइटी की नौ टीमें बनी थी। एसआइटी पहले सीएसजेएमयू पहुंची था, जहां से डिग्री-मार्कशीट की जानकारियां मांगी थी।इसके बाद बुधवार को लिंग्या विश्विविद्यालय फरीदाबाद की 100 और मोनाड विश्वविद्यालय की तीन डिग्रियां की जांच की। सत्यापन में वह फर्जी निकलीं।
इसके बाद गुरुवार को जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद फिरोजाबाद पहुंची। वहां की 12 डिग्रियां फर्जी मिलीं। अपर पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय संकल्प शर्मा ने बताया कि अब तक उनकी टीम जिन विद्यालय व विश्वविद्यालयों में पहुंची है। उन सभी जगहों की मार्कशीट-डिग्रियां फर्जी पाई गई। अभी टीम को नौ और विश्वविद्यालयों में जाकर जांच करनी है, पर अब तक की जांच में एक और बात सामने आई है कि जिन जगहों पर भी एसआइटी पहुंची थी। वहां कहीं भी वह डिग्रियां आनलाइन नहीं दिखा रही थी। ऐसे में या तो आरोपित मार्कशीट-डिग्रियां बनाने का खुद ठेका लेते हैं और खुद ही उसे सत्यापित कराने के लिए उस विश्वविद्यालयों की फर्जी वेबसाइट भी बना देते हैं, जिससे लोग भरोसा कर लेते हैं।


