भवन निर्माण के लिए मसूरी में राजमार्ग को पहुंचाई क्षति, अब 91 लाख रुपये की वसूली

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मसूरी में लाइब्रेरी चौक के पास त्यूणी-चकराता-मसूरी-बाटाघाट राजमार्ग के पुश्ते को नुकसान पहुंचाने के मामले में प्रशासन की कार्रवाई एफआइआर तक सीमित नहीं रही।

एक तरफ जहां जिला खनिज कार्यालय ने अवैध खनन के मामले में 11.64 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, वहीं जिला प्रशासन ने राजमार्ग के पुश्ते को पहुंचे नुकसान पर तीन भूस्वामियों की 80 लाख की आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी की है।

यह राशि अदा न की जाने की सूरत में संबंधित से भू राजस्व की भांति संपत्ति की नीलामी कर वसूली की जाएगी।

मसूरी में राष्ट्रीय राजमार्ग का पुश्ता एक भवन के निर्माण के लिए की गई गहरी खोदाई और पहाड़ी कटान के चलते 13 फरवरी को ढह गया था।

प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने संयुक्त टीम का गठन कर जांच कराई थी। पता चला था कि जिस भूमि पर खोदाई के कारण पुश्ता क्षतिग्रस्त हुआ है, वह अनीता थलवाल (सभासद पवन थलवाल की पत्नी), सुनीता धनई और सतीश गोयल के स्वामित्व में हैं।

जांच में पाया गया कि भूमि पर भवन निर्माण का भारी मलबा जमा था, जो अपनी जगह से खिसक गया और उससे राजमार्ग का पुश्ता क्षतिग्रस्त हो गया।

प्रकरण में उसी दिन देर शाम तीनों भवन स्वामियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा लिया गया था। वहीं, अब जिला खनिज विभाग की जांच में मौके पर अवैध खनन भी पाया गया। जिस पर 11 लाख रुपये का जुर्माना (रायल्टी का तीन गुना) लगाया गया।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने निर्देश दिए कि सरकारी संपत्ति के रूप में राजमार्ग के पुश्ते को पहुंची क्षति की वसूली भी भूमि के स्वामियों से की जानी आवश्यक है।

लिहाजा, गणना करते हुए 80 लाख रुपये की आरसी जारी की गई। इस राशि की वसूली शीघ्र किए जाने के निर्देश राजस्व विभाग के अधिकारियों को दिए गए हैं।

संवेदनशील क्षेत्र में पहाड़ी का कटान और सामग्री ढोकर ले गए

जिला खान अधिकारी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, भवन निर्माण के लिए 17.5 लंबाई और 17.5 मीटर चौड़ाई में पहाड़ी का कटान किया गया।

वहीं, राजमार्ग की सतह से पांच मीटर गहराई में भी खोदाई की गई, जिससे 4384.8 टन चूना मिश्रित पत्थर मिश्रित मिट्टी निकाली गई। मिट्टी का परिवहन भी अन्यत्र कर दिया गया।

भौगोलिक और पर्यावरणीय रूप में अति संवेदनशील मसूरी क्षेत्र में इस कृत्य को गंभीरता से लिया गया, क्योंकि ढालदार क्षेत्रों में इस तरह पहाड़ी कटान पर प्रतिबंध है।

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