महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एमजीएम) की दशा और दिशा सुधारने की कवायद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है।
लगातार डीसी के निरीक्षण और सख्त निर्देशों के बाद अस्पताल प्रशासन ने कई अहम फैसले लिए हैं। हाल ही में अस्पताल के उपाधीक्षक को पद से हटाते हुए जिम्मेदारी अब केवल डॉ. जुझार माझी को सौंपी गई है।
पदाधिकारियों का कहना है कि एक विशेष एक्शन प्लान के तहत तय समय-सीमा में सभी कार्य पूरे किए जाएंगे। प्रशासन की प्राथमिकता है कि मरीजों को अस्पताल परिसर में ही सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी मरीज को बाहर से दवा खरीदने की जरूरत न पड़े।
साथ ही सिटी स्कैन और एमआरआई जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधाओं को नियमित और सुलभ बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि 24 घंटे चिकित्सकों की वार्ड में तैनाती अनिवार्य की जाएगी, ताकि इमरजेंसी या गंभीर मामलों में तत्काल उपचार मिल सके। इससे मरीजों और परिजनों की परेशानी कम होगी।
साफ-सफाई और बाहरी जांच पर सख्त नजर
एमजीएम की छवि सुधारने के लिए साफ-सफाई पर विशेष फोकस किया जा रहा है। अस्पताल परिसर, वार्ड और ओपीडी क्षेत्रों की नियमित मानिटरिंग होगी। स्वच्छता को लेकर लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। इसके अलावा बाहरी जांचों पर भी अंकुश लगाने की तैयारी है।


