बांग्लादेश चुनाव में BNP की बंपर जीत, 17 साल बाद लौटे तारिक रहमान का पीएम बनना तय; 10 बड़ी बातें

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 बांग्लादेश में गुरुवार को हुए 13वें संसदीय चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान (Tarique Rahman) की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) प्रचंड जीत हासिल करती हुई नजर आ रही है।

रॉयटर्स ने एक स्थानीय टीवी के हवाले से कहा कि बीएनपी ने 300 सदस्यों वाली संसद में 212 सीटें जीत ली हैं जबकि कई अन्य सीटों पर उसके उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं।

बांग्लादेश चुनाव 2026 के नतीजों के 10 मुख्य बिंदु

1. भारतीय समयानुसार बांग्लादेश में गुरुवार शाम 4 बजे मतदान समाप्त हुआ। चुनाव के बाद वोटों की गिनती जारी है। शुक्रवार सुबह आए अनुमानों के मुताबिक, बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 212 सीटें जीतीं, जबकि जमात के नेतृत्व वाले गठबंधन को 70 सीटें मिलीं।

2. 350 में 299 सीटों पर हुआ मतदान

गुरुवार को हुए चुनाव में जातीय संसद की 299 सीटों के लिए मतदाताओं ने मतदान किया, जिसके लिए बहुमत का आंकड़ा 150 है। शेरपुर-3 निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण मतदान रद कर दिया गया था। जातीय संसद में 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, और उनका चुनाव 300 सामान्य सीटों में दलों के प्रतिनिधित्व के आधार पर होता है।

3. बांग्लादेश में पहला ऐसा चुनाव

बांग्लादेश में ऐसा पहला आम चुनाव हो रहा है, जब अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना शामिल नहीं हैं और वह भारत में हैं। वहीं, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, जिनका पिछले साल दिसंबर में निधन हो गया था। खालिदा जिया ने दशकों तक देश की राजनीति पर अपना दबदबा बनाए रखा था।

4. 17 वर्षों बाद लौटकर कैसे जीतें चुनाव?

खालिदा जिया की मौत के बाद उनके बेटे तारिक रहमान लगभग 17 वर्षों के निर्वासन के बाद देश लौटे और अवामी लीग की अनुपस्थिति में प्रधानमंत्री पद के लिए तेजी से अग्रणी दावेदार के रूप में उभरे, क्योंकि अवामी लीग अपना पंजीकरण निलंबित होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सकी।

 

5. बीएनपी का मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन है। जमात कई वर्षों तक बीएनपी का सहयोगी रहा है। जमात का समर्थन करने वाली पार्टियों में नेशनल सिटिजन पार्टी भी शामिल है। छात्रों और युवाओं का यह वही संगठन है जो हसीना विरोधी प्रदर्शनों से उभरा है।

6. ढाका से पहले हिंदू सांसद बनने की संभावना

बांग्लादेश में वोटों की गिनती जारी है। शुरुआती रुझानों में गायेश्वर चंद्र रॉय ढाका 3 सीट से बढ़त बनाए हुए हैं। अगर वह चुनाव जीतते हैं तो 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति के बाद ढाका से पहले हिंदू सांसद बनने की संभावना रखते हैं।

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