राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में जारी आंतरिक कलह अब थमती नजर नहीं आ रही है। पार्टी के भीतर असंतोष इस कदर बढ़ चुका है कि एक बागी विधायक ने यहां तक कह दिया है कि वह राजनीति छोड़ना बेहतर समझेंगे, लेकिन ऐसे नेतृत्व के साथ दोबारा नहीं जुड़ेंगे जो कहे कुछ और करे कुछ।
बाजपट्टी से विधायक रामेश्वर महतो ने पत्रकारों से बातचीत में अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उन्होंने न केवल अपनी पीड़ा रखी, बल्कि उन कार्यकर्ताओं की आवाज भी उठाई जो वर्षों से उपेंद्र कुशवाहा के साथ जुड़े रहे हैं।
रामेश्वर महतो ने साफ शब्दों में कहा कि राजनीति उनके लिए पेट भरने का जरिया नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर समाजसेवा की बात की जाती है, तो फिर सत्ता और पद का लाभ सिर्फ एक परिवार तक ही क्यों सीमित रह जाता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं, तो करीब 20 साल बाद उनके बेटों ने चुनाव लड़ा, विधायक बने और मंत्री पद तक पहुंचे। लेकिन सवाल यह है कि कुशवाहा के बेटे ने कौन सा चुनाव लड़ा है। महतो ने तीखे लहजे में कहा कि समाजसेवा की बात कर सत्ता की ‘मेवा’ खुद तक सीमित कर लेना स्वीकार्य नहीं है।
बागी विधायक ने यह भी कहा कि अगर एक ही परिवार में चार-चार पद होंगे, तो वर्षों से पार्टी के लिए नारे लगाने वाले कार्यकर्ता कहां जाएंगे। उनके घरों में भी चूल्हा जलना चाहिए।
रामेश्वर महतो ने बताया कि उनकी आखिरी बातचीत 4 दिसंबर को उपेंद्र कुशवाहा से हुई थी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जो कार्यकर्ता 20 वर्षों से पार्टी का झंडा उठाए खड़े हैं और आंखों में आंसू लिए सवाल कर रहे हैं, उनका भविष्य क्या होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह के लालच के लिए राजनीति नहीं कर रहे और न ही ऐसी राजनीति का हिस्सा बनना चाहते हैं, जहां कथनी और करनी में फर्क हो।

